भारतीय शेयर 27 अक्टूबर, 2026 को लगभग अपरिवर्तित बंद हुए। हालांकि, छोटे आकार की कंपनियों में तेजी और आईटी तथा बैंकिंग शेयरों में गिरावट के बीच बड़ा अंतर छिपा रहा। सेंसेक्स 0.01% फिसला, जबकि निफ्टी 50 में 0.02% की मामूली गिरावट आई।
मुख्य बातें
- निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 2.69% की बढ़त हुई, जबकि निफ्टी आईटी सूचकांक 1.4% से अधिक गिरा।
- इन्फोसिस ने वित्त वर्ष 2027 के लिए राजस्व वृद्धि का अनुमान घटाया था; टीसीएस और विप्रो भी गिरावट के साथ बंद हुए।
- सरकार ने लगभग ₹2.12 लाख करोड़ के रक्षा खरीद प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिनमें से 82% घरेलू विनिर्माताओं के लिए निर्धारित है।
सपाट बेंचमार्क के पीछे भारतीय शेयरों में अलग-अलग रुझान
सत्र के दौरान सेंसेक्स 73,179.41 और 73,762.98 के बीच उतार-चढ़ाव के बाद 73,598.67 पर बंद हुआ। निफ्टी 50 ने कारोबार के दौरान 22,829.75 का उच्च स्तर छुआ और 22,749.75 पर बंद हुआ।
छोटे शेयरों ने बेंचमार्क से बेहतर प्रदर्शन किया, जबकि बैंक निफ्टी में गिरावट आई। मीडिया, रियल्टी, फार्मा और ऑटो बढ़त वाले क्षेत्रों में शामिल रहे; निजी बैंक, सीमेंट और वित्तीय सेवाओं का प्रदर्शन कमजोर रहा।
| मद | विवरण |
|---|---|
| बीएसई सेंसेक्स | 73,598.67; 8.08 अंक या 0.01% नीचे |
| निफ्टी 50 | 22,749.75; 3.45 अंक या 0.02% नीचे |
| बैंक निफ्टी | 53,974.90; 391.80 अंक या 0.72% नीचे |
| निफ्टी मिडकैप 100 | 1% ऊपर |
| निफ्टी स्मॉलकैप 100 | 2.69% ऊपर |
इन्फोसिस के अनुमान घटाने के बाद आईटी शेयरों में गिरावट
इन्फोसिस द्वारा वित्त वर्ष 2027 के लिए राजस्व वृद्धि का अनुमान घटाने के बाद निफ्टी आईटी सूचकांक 1.4% से अधिक गिरा। टीसीएस और विप्रो भी गिरावट के साथ बंद हुए।
सरकार द्वारा लगभग ₹2.12 लाख करोड़ के अधिग्रहण प्रस्तावों को मंजूरी दिए जाने के बाद रक्षा शेयरों में तेजी आई। यह मंजूरी प्रस्तावित खरीद के लिए है; इसका अर्थ यह नहीं है कि खरीद पूरी हो चुकी है।
तेल के $115 से ऊपर बने रहने के बीच रुपया मजबूत
अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 9 पैसे मजबूत होकर 95.08 पर बंद हुआ। ब्रेंट कच्चा तेल 115 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहा, जबकि एमसीएक्स पर सोना लगभग ₹750 गिरकर ₹1,42,300 पर आ गया।
बाजार की अपेक्षित अस्थिरता का मापक इंडिया वीआईएक्स 4.4% गिरकर 16.53 पर आ गया।
अगला प्रमुख घटनाक्रम
28 अक्टूबर को निवेशक जियो प्लेटफॉर्म्स की नियोजित लिस्टिंग और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले पर नजर रखेंगे। साथ ही, कई भारतीय कंपनियों की निर्धारित तिमाही आय घोषणाओं पर भी ध्यान रहेगा।
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