विज्ञापन एजेंसी ब्लिंक डिजिटल के साथ विवाद में मेटा की क्षेत्राधिकार संबंधी चुनौती बॉम्बे हाई कोर्ट ने खारिज कर दी है। इससे निष्क्रिय किए गए व्यावसायिक खातों और कॉर्पोरेट पेजों से जुड़ा मामला भारत में आगे बढ़ सकेगा।

मेटा की क्षेत्राधिकार संबंधी चुनौती क्यों महत्वपूर्ण है

मेटा ने संविदात्मक क्षेत्राधिकार प्रावधानों का हवाला देते हुए तर्क दिया कि विवाद की सुनवाई कैलिफ़ोर्निया की अदालतों में होनी चाहिए। ब्लिंक डिजिटल ने इस आवेदन का विरोध किया और भारत में अपने दावों को आगे बढ़ाने की मांग की।

न्यायमूर्ति संदीप वी. मरने ने मामले की सुनवाई की। चुनौती खारिज होने से बॉम्बे हाई कोर्ट में कार्यवाही आगे बढ़ सकेगी, लेकिन मूल दावों पर अभी फैसला नहीं हुआ है। अदालत के कारणों को स्पष्ट करने वाला लिखित आदेश 27 अक्टूबर, 2026 तक प्रतीक्षित था।

खाते बहाल करने और हर्जाने की मांग

यह विवाद तब शुरू हुआ जब ब्लिंक डिजिटल के बिज़नेस मैनेजर खाते और उनसे जुड़े कॉर्पोरेट पेज निष्क्रिय कर दिए गए। एजेंसी ने उन्हें बहाल करने के साथ-साथ मेटा प्लेटफ़ॉर्म्स, इंक. और फेसबुक इंडिया ऑनलाइन सर्विसेज़ प्राइवेट लिमिटेड से 1,158 करोड़ रुपये के हर्जाने और मुआवज़े की मांग की है।

अदालत 2 नवंबर, 2026 को शाम 4 बजे अंतरिम राहत के लिए ब्लिंक डिजिटल के आवेदन पर सुनवाई करेगी।

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