दक्षिण कोरिया सरकार द्वारा कराए गए एक अध्ययन में पाया गया कि कई श्रेणियों में कागज़ के स्ट्रॉ का पर्यावरणीय प्रभाव पारंपरिक प्लास्टिक स्ट्रॉ से अधिक था। आकलन में उत्पादों के पूरे जीवन-चक्र के संभावित प्रभाव मापे गए, न कि स्ट्रॉ के इस्तेमाल से होने वाले सीधे स्वास्थ्य जोखिम को।

कागज़ के स्ट्रॉ और जीवन-चक्र के प्रभाव

अध्ययन में पाया गया कि कागज़ के स्ट्रॉ का कैंसरकारी प्रभाव पारंपरिक प्लास्टिक स्ट्रॉ से 6.33 गुना और अम्लीकरण प्रभाव 2.04 गुना था। कैंसरकारी प्रभाव का पैमाना कच्चे माल के प्रसंस्करण और निपटान जैसे चरणों के दौरान उत्सर्जन से जुड़े संभावित कैंसर जोखिमों को दर्शाता है; यह पेय पीने वाले व्यक्ति के सीधे संपर्क को नहीं मापता।

अम्लीकरण का पैमाना उत्सर्जन से पर्यावरण की अम्लता बढ़ने की संभावित गुंजाइश को मापता है, जिससे पारिस्थितिकी तंत्र को नुकसान हो सकता है। यह आकलन दक्षिण कोरिया के जलवायु, ऊर्जा और पर्यावरण मंत्रालय ने कराया था और इसका खुलासा विपक्षी पीपल पावर पार्टी के सांसद किम वी-सांग ने किया।

अन्य सामग्रियों की तुलना

शोधकर्ताओं ने पर्यावरणीय प्रभाव की 16 श्रेणियों में पारंपरिक प्लास्टिक, कागज़, जैव-अपघटनीय प्लास्टिक और जैव-आधारित पॉलीथीन के स्ट्रॉ का आकलन किया। जैव-अपघटनीय प्लास्टिक स्ट्रॉ का कैंसरकारी प्रभाव पारंपरिक प्लास्टिक स्ट्रॉ से 3.34 गुना और अम्लीकरण प्रभाव 1.98 गुना दर्ज किया गया।

जलवायु परिवर्तन, मानव विषाक्तता, कणीय पदार्थ और अम्लीकरण समेत 16 में से 10 श्रेणियों में पारंपरिक प्लास्टिक का प्रभाव सबसे कम था। इसलिए नतीजे इस बात के अनुसार बदलते हैं कि पर्यावरण के किस पैमाने का आकलन किया जा रहा है।

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