1 अप्रैल, 2029 से लागू होने वाला भारत का रियर-इम्पैक्ट नियम, उद्योग के एक सांकेतिक अनुमान के आधार पर, यात्री वाहनों की निर्माण लागत में सालाना लगभग ₹2,700 करोड़ जोड़ सकता है। वास्तविक बोझ इस बात पर निर्भर करेगा कि निर्माताओं को अपने मौजूदा वाहन प्लेटफॉर्म को अनुपालन में लाने के लिए कितना काम करना होगा।

मुख्य बातें

  • यह अधिसूचना अप्रैल 2029 से इसके दायरे में आने वाले यात्री वाहनों पर संशोधित AIS-101 Revision 1 लागू करती है।
  • लागत अनुमान में सालाना 50 लाख वाहनों की बिक्री मानकर चला गया है और इसमें एकमुश्त इंजीनियरिंग, टूलिंग और प्रमाणन लागत शामिल नहीं है।
  • छोटी कारों पर मार्जिन का खास दबाव पड़ सकता है, जबकि इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों की प्रति वाहन अनुमानित अतिरिक्त लागत सबसे अधिक है।

भारत के रियर-इम्पैक्ट नियम की आवश्यकताएँ

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने 19 अक्टूबर, 2026 को अधिसूचना S.O. 5723(E) जारी की। 21 अक्टूबर को प्रकाशित यह अधिसूचना 1 अप्रैल, 2029 से इसके दायरे में आने वाले यात्री वाहनों पर संशोधित AIS-101 Revision 1 लागू करती है।

निर्माताओं को पीछे के ढाँचों को मजबूत करना और ईंधन प्रणालियों तथा इलेक्ट्रिक-वाहन बैटरियों की सुरक्षा करनी पड़ सकती है। उपलब्ध विवरण में पिछली आवश्यकताओं का उल्लेख नहीं है, इसलिए इससे पुराने नियम के साथ सीधी तुलना स्थापित नहीं होती।

मदविवरण
छोटी कारेंप्रति वाहन अनुमानित अतिरिक्त लागत ₹5,000; माना गया बाजार हिस्सा 35%; सालाना लागत ₹875 करोड़
पारंपरिक SUV और सेडानप्रति वाहन ₹4,000; माना गया हिस्सा 55%; सालाना लागत ₹1,100 करोड़
इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनप्रति वाहन ₹15,000; दोनों का माना गया संयुक्त हिस्सा 10%; सालाना लागत ₹750 करोड़

अनुमानित लागत का विभाजन

सांकेतिक गणना में सालाना 50 लाख वाहनों की बिक्री मानी गई है। इसके अनुसार, प्रति छोटी कार ₹5,000, प्रति पारंपरिक SUV या सेडान ₹4,000 और प्रति इलेक्ट्रिक या हाइब्रिड वाहन ₹15,000 की अतिरिक्त निर्माण लागत होगी।

छोटी कारों के लिए 35%, पारंपरिक SUV और सेडान के लिए 55%, तथा इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड वाहनों के लिए 10% बाजार हिस्सेदारी मानने पर अनुमान सालाना कुल ₹2,725 करोड़ बैठता है, यानी प्रति वाहन औसतन ₹5,450। यह शोरूम कीमतों में वृद्धि का पूर्वानुमान नहीं है।

₹5 लाख से ₹6 लाख कीमत वाली छोटी कार के लिए ₹5,000 की अनुमानित अतिरिक्त लागत कीमत का 0.83% से 1% है। प्रवेश-स्तर के मॉडलों पर मार्जिन का अधिक दबाव पड़ सकता है, जबकि तुलनीय अंतरराष्ट्रीय मानकों का पहले से पालन करने वाले नए प्लेटफॉर्म में कम बदलाव की जरूरत हो सकती है।

निर्माताओं और आपूर्तिकर्ताओं के लिए संभावित बदलाव

हैचबैक और कॉम्पैक्ट सेडान में पीछे के क्रॉस-मेंबर को मजबूत करना, ईंधन टैंक के ब्रैकेट अधिक मजबूत करना और ईंधन लाइनों को ढकना जरूरी हो सकता है। पारंपरिक SUV और सेडान में पीछे के संरचनात्मक सदस्यों और ईंधन प्रणाली की सुरक्षा में बदलाव की जरूरत पड़ सकती है।

इलेक्ट्रिक वाहनों में बैटरी के आवरण को मजबूत करना, अधिक मजबूत माउंटिंग ब्रैकेट और हाई-वोल्टेज केबल की सुरक्षा जरूरी हो सकती है। हाइब्रिड वाहनों में पारंपरिक ईंधन प्रणालियों की सुरक्षा भी आवश्यक हो सकती है। इससे पुर्ज़ा आपूर्तिकर्ताओं को ऑर्डर मिल सकते हैं, हालांकि वास्तविक लागत प्लेटफॉर्म की तैयारी और स्थानीयकरण पर निर्भर करेगी।

अगला पड़ाव

पुष्ट पड़ाव 1 अप्रैल, 2029 है, जब यह नियम इसके दायरे में आने वाले यात्री वाहनों पर लागू होगा।

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