Centre for Research on Energy and Clean Air (CREA) के अनुमान के अनुसार, भारत, तुर्किये और ब्रुनेई में रूसी कच्चे तेल का प्रसंस्करण करने वाली रिफाइनरियों से रिफाइनरी ईंधन का निर्यात सितंबर 2026 में लगभग €1 billion तक पहुंच गया, जो अगस्त से 43% अधिक था। यह वृद्धि तीनों देशों को कवर करती है, केवल भारत को नहीं, और यूरोपीय संघ की हिस्सेदारी सबसे बड़ी थी।

मुख्य बातें

  • 43% की वृद्धि में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले देशों को भारत, तुर्किये और ब्रुनेई की रिफाइनरियों से हुआ निर्यात शामिल था।
  • CREA का अनुमान था कि निर्यात किए गए उत्पादों में से €295 million रूसी कच्चे तेल से परिष्कृत किए गए थे।
  • सितंबर में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात 13% गिरा, जो लगातार दूसरी मासिक गिरावट थी।

विषय-सूची

तीन देशों में रिफाइनरी ईंधन का निर्यात बढ़ा

CREA के सितंबर 2026 के जीवाश्म ईंधन विश्लेषण के मुताबिक, प्रतिबंध लगाने वाले देशों को लगभग €1 billion की खेप भेजी गई। यह आंकड़ा निगरानी के दायरे में आने वाली रिफाइनरियों से उन गंतव्यों को निर्यात किए गए सभी तेल उत्पादों को कवर करता है; इसमें यह अनुमान शामिल नहीं है कि हर खेप रूसी फीडस्टॉक से बनाई गई थी।

यूरोपीय संघ सबसे बड़ा गंतव्य था, उसके बाद ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और न्यूज़ीलैंड थे। CREA ने रूसी कच्चे तेल से बने उत्पादों का हिस्सा €295 million आंका।

सितंबर के दौरान यूरोपीय संघ के बंदरगाहों पर उतारी गई सात खेपों में से छह की आपूर्ति गुजरात स्थित Reliance Industries की जामनगर रिफाइनरी ने की। शेष खेप तुर्किये की Tupras Izmit रिफाइनरी से आई। इटली को तीन, रोमानिया को दो और स्पेन तथा साइप्रस को एक-एक खेप मिली।

मदविवरण
यूरोपीय संघनिगरानी वाली रिफाइनरियों से सितंबर 2026 में आयात किए गए तेल उत्पादों का मूल्य €667 million
ऑस्ट्रेलिया€168 million
संयुक्त राज्य अमेरिका€154 million
न्यूज़ीलैंड€19 million

यूरोपीय संघ में पहुंचने वाली खेपों से फीडस्टॉक के स्रोत पर सवाल

रूसी कच्चे तेल से बने तेल उत्पादों के आयात पर यूरोपीय संघ का प्रतिबंध 21 जनवरी 2026 से लागू हुआ। रूसी कच्चे तेल का उपयोग करने वाली रिफाइनरियों से आने वाली खेपों की जांच जरूरी है, लेकिन किसी रिफाइनरी में रूसी फीडस्टॉक का उपयोग अपने आप में हर निर्यातित उत्पाद का स्रोत तय नहीं करता और न ही यह साबित करता है कि हर खेप ने प्रतिबंध का उल्लंघन किया।

निगरानी वाली रिफाइनरियों से यूरोपीय संघ के बंदरगाहों के लिए निर्धारित बताए गए निर्यात का मूल्य महीने-दर-महीने 80% बढ़ा। इस माप में जामनगर से Rotterdam जा रही 104,000-tonne गैसऑयल की खेप भी शामिल थी, जो अभी रास्ते में थी; यह उन खेपों से अलग है जिन्हें पहले ही उतारा जा चुका था।

CREA ने रिफाइनरी-स्तर पर ऐसा प्रतिबंध लगाने की मांग की, जो पिछले छह महीनों में रूसी कच्चे तेल का प्रसंस्करण करने वाले किसी भी संयंत्र के उत्पादों पर लागू हो, चाहे उत्पादों का घोषित स्रोत कुछ भी हो। यह शोध समूह की सिफारिश है, अपनाई गई नीति नहीं।

निर्यात बढ़ने के बावजूद भारत ने रूसी कच्चा तेल कम खरीदा

सितंबर में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात 13% गिरकर अप्रैल 2026 के बाद के सबसे निचले स्तर पर आ गया। जामनगर में आवक 27%, Indian Oil Corporation की Paradip रिफाइनरी में 21% और Nayara Energy की Vadinar रिफाइनरी में 8% घटी। गिरावट के बावजूद, Vadinar भारत के सबसे बड़े रूसी कच्चे तेल आयातक के रूप में जामनगर से आगे निकल गया।

फिर भी भारत, चीन के बाद रूस का दूसरा सबसे बड़ा जीवाश्म ईंधन ग्राहक बना रहा और उसने महीने के दौरान €4.1 billion के रूसी हाइड्रोकार्बन खरीदे। कच्चे तेल का हिस्सा 88%, यानी €3.6 billion था।

Kpler के विश्लेषकों ने मात्रा में गिरावट के एक हिस्से का कारण, केवल अमेरिकी दबाव के बजाय, आपूर्ति में कमी और चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा को बताया। उनका अनुमान था कि अक्टूबर में भारत का आयात प्रतिदिन 1.8 million–1.9 million बैरल पर रहेगा; यह पूर्वानुमान है, रिपोर्ट किया गया मासिक परिणाम नहीं।

निष्कर्ष

सितंबर में वृद्धि परिष्कृत ईंधन के निर्यात में हुई, जबकि भारत की रूसी कच्चे तेल की आवक घटी। CREA के विश्लेषण में Rotterdam जाने वाली जामनगर की खेप अभी रास्ते में थी; अक्टूबर के अंतिम आयात आंकड़ों के साथ उसका पहुंचना भी नजर रखने योग्य एक ठोस खेप है।

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