22 अक्टूबर, 2026 को भारतीय बॉन्ड लगातार तीसरे सत्र में गिरे। बढ़ती तेल कीमतों ने मुद्रास्फीति की चिंताओं और भारतीय रिज़र्व बैंक की ओर से ब्याज दरें और बढ़ाए जाने की उम्मीदों को तेज किया, जिससे बेंचमार्क सरकारी यील्ड 7.45% से ऊपर पहुंच गई।
मुख्य बातें
- बेंचमार्क 2036 बॉन्ड यील्ड पिछले सत्र से 1.69 आधार अंक बढ़कर 7.4596% पर बंद हुई।
- अक्टूबर की शुरुआत में RBI द्वारा रेपो दर बढ़ाकर 5.50% किए जाने के बाद, 112.50 डॉलर प्रति बैरल के तेल भाव ने मुद्रास्फीति संबंधी चिंताएं बढ़ा दीं।
- सरकारी बॉन्ड में बिकवाली के बावजूद ओवरनाइट इंडेक्स्ड स्वैप दरें मोटे तौर पर अपरिवर्तित रहीं।
विषय-सूची
- भारतीय बॉन्ड में यील्ड की 10 सप्ताह की बढ़त जारी
- तेल और खाद्य लागत से दरों को लेकर चिंताएं तेज
- निवेशक आगे की सख्ती का आकलन कर रहे हैं, स्वैप स्थिर
- निष्कर्ष
भारतीय बॉन्ड में यील्ड की 10 सप्ताह की बढ़त जारी
2036 में परिपक्व होने वाले बेंचमार्क 6.94% सरकारी बॉन्ड की यील्ड पिछले सत्र के 7.4427% के मुकाबले 7.4596% पर बंद हुई। पिछले 10 सप्ताह में इसकी संचयी वृद्धि 69 आधार अंक तक पहुंच गई।
बॉन्ड यील्ड कीमतों के विपरीत दिशा में चलती है, इसलिए इसमें बढ़ोतरी बेंचमार्क प्रतिभूति के बाजार मूल्य में और गिरावट दर्शाती है। हालिया बंद भाव से यील्ड मनोवैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण 7.45% के स्तर से भी ऊपर चली गई।
InCred Global Asset Management में मल्टी-स्ट्रैटेजी क्रेडिट के प्रबंध निदेशक और प्रमुख तanuj Khosla ने कहा कि तेल की ऊंची कीमतें और अमेरिकी यील्ड भारत समेत उभरते बाजारों में यील्ड बढ़ा रही हैं।
| मद | विवरण |
|---|---|
| एक-वर्षीय ओवरनाइट इंडेक्स्ड स्वैप | 22 अक्टूबर, 2026 को 6.56% पर बंद हुआ। |
| दो-वर्षीय ओवरनाइट इंडेक्स्ड स्वैप | 6.63% पर बंद हुआ। |
| पांच-वर्षीय ओवरनाइट इंडेक्स्ड स्वैप | तरल पांच-वर्षीय दर 6.80% पर स्थिर हुई। |
तेल और खाद्य लागत से दरों को लेकर चिंताएं तेज
एशियाई कारोबार में तेल चढ़कर 112.50 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया और ब्रेंट मई के बाद के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंचा। सऊदी अरब में हूतियों के आगे के हमलों ने मध्य पूर्व में व्यापक संघर्ष और कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने की चिंताएं बढ़ा दीं।
भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 90% आयात करता है, जिससे वह ऊर्जा लागत में लगातार बढ़ोतरी के प्रति संवेदनशील है। कमजोर मानसून के बाद खाद्य कीमतें बढ़ने से दबाव और बढ़ा। अर्थशास्त्रियों को खुदरा मुद्रास्फीति RBI की 6% की ऊपरी सहन-सीमा से अधिक रहने की उम्मीद है।
RBI ने अक्टूबर की शुरुआत में रेपो दर बढ़ाकर 5.50% कर दी—करीब चार वर्षों में पहली बढ़ोतरी—और संतुलित सख्ती का रुख अपनाया। नवीनतम नीति बैठक के कार्यवृत्त में आगे की बढ़ोतरी के संकेत दिए गए।
2020 में प्रकाशित ब्याज-दर संचरण की RBI की व्याख्या बताती है कि केंद्रीय बैंक की ऊंची दरें किस तरह उधारी लागत तक पहुंच सकती हैं और खर्च तथा मुद्रास्फीति को नियंत्रित कर सकती हैं। यह नीतिगत तंत्र आगे सख्ती को लेकर बाजार की चिंता की पृष्ठभूमि प्रस्तुत करता है; इससे अगली बढ़ोतरी का समय तय नहीं होता।
निवेशक आगे की सख्ती का आकलन कर रहे हैं, स्वैप स्थिर
ओवरनाइट इंडेक्स्ड स्वैप दरें मोटे तौर पर अपरिवर्तित रहीं, जबकि सरकारी बॉन्ड की कीमतें गिरीं। अधिकांश नकारात्मक कारक स्वैप मूल्य निर्धारण में पहले ही शामिल हो चुके थे।
Khosla को उम्मीद थी कि साल के अंत से पहले बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड 7.50%–7.60% को परखेगी, बशर्ते ब्रेंट 112 डॉलर प्रति बैरल से उल्लेखनीय रूप से नीचे न आए। उन्हें दिसंबर में RBI की दर वृद्धि की भी उम्मीद थी। ये उनके पूर्वानुमान हैं, केंद्रीय बैंक का घोषित निर्णय नहीं।
निष्कर्ष
बिकवाली के बाद बेंचमार्क यील्ड 7.45% से ऊपर रही, जबकि स्वैप में बहुत कम अतिरिक्त पुनर्मूल्यांकन दिखा। तेल की कीमतें और आने वाले मुद्रास्फीति आंकड़े निगरानी के प्रमुख कारक हैं; RBI की एक और बढ़ोतरी अभी उम्मीद है, घोषित निर्णय नहीं।
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