भारतीय शेयरों ने शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026 को दिन के कारोबार में आई तेज गिरावट का बड़ा हिस्सा वापस हासिल किया, लेकिन लगातार चौथे सत्र में गिरावट के साथ बंद हुए। सेंसेक्स 126 अंक गिरकर 73,124 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 88 अंक गिरकर 22,600 पर आ गया। छोटी कंपनियों में अधिक बिकवाली हुई।
मुख्य बातें
- सेंसेक्स और निफ्टी ने क्रमशः 72,500 और 22,400 से नीचे के इंट्राडे स्तरों से वापसी की।
- बेंचमार्क सूचकांकों की देर से हुई रिकवरी के बावजूद, बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों की तुलना में गिरावट वाले शेयरों की संख्या कहीं अधिक रही।
- 27–28 अक्टूबर की फेड बैठक से पहले 114 डॉलर प्रति बैरल का तेल और विदेशी निवेशकों की फिर से बिकवाली ने बाजार धारणा पर दबाव डाला।
विषय-सूची
- भारतीय शेयर सत्र के निचले स्तरों से उबरे
- कमजोर बाजार व्यापकता ने बेंचमार्क से परे दबाव उजागर किया
- फेड से पहले तेल और विदेशी निवेशकों की निकासी पर नजर
- निष्कर्ष
भारतीय शेयर सत्र के निचले स्तरों से उबरे
कारोबार के दौरान सेंसेक्स 700 से अधिक अंक गिरा और कुछ समय के लिए 72,500 से नीचे चला गया, जबकि निफ्टी 250 से अधिक अंक गिरकर 22,400 से नीचे कारोबार करने लगा। इसके बाद हुई रिकवरी से बंद होते समय की गिरावट काफी कम हो गई।
बिकवाली के सबसे तेज दौर में बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के कुल बाजार मूल्य से अस्थायी तौर पर 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक कम हो गए। यह इंट्राडे गिरावट थी, न कि बंद होने तक बने रहे नुकसान का आंकड़ा।
दोनों बेंचमार्क सूचकांक सप्ताह में भी गिरावट के साथ बंद हुए, जिससे उनकी दो सप्ताह की बढ़त का सिलसिला थम गया। इसलिए देर से आई तेजी ने शुक्रवार की गिरावट को तो कम किया, लेकिन सप्ताह भर की व्यापक कमजोरी को पलटा नहीं।
| मद | विवरण |
|---|---|
| टाटा स्टील और अडानी पोर्ट्स | दोनों के शेयर 3% से अधिक गिरे। |
| एटरनल | व्यापक गिरावट के उलट, शेयर 4% चढ़े। |
| निफ्टी मेटल | सूचकांक लगभग 3% गिरा। |
| निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स | सूचकांक लगभग 3% गिरा। |
| निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी रियल्टी | दोनों सूचकांक 2% से अधिक गिरे। |
कमजोर बाजार व्यापकता ने बेंचमार्क से परे दबाव उजागर किया
बिकवाली, बेंचमार्क सूचकांकों में बंद होते समय दर्ज मामूली गिरावट से कहीं अधिक व्यापक थी। एनएसई पर 3,011 शेयर गिरे, 624 चढ़े और 89 अपरिवर्तित रहे—यानी हर बढ़त वाले शेयर के मुकाबले लगभग पांच शेयर गिरावट में थे।
कारोबार के दौरान स्मॉल-कैप और मिड-कैप शेयरों का प्रदर्शन लार्ज-कैप बेंचमार्क से कमजोर रहा। मेटल, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक और रियल एस्टेट शेयर सबसे कमजोर समूहों में शामिल थे, जबकि अलग-अलग शेयरों के प्रदर्शन में काफी अंतर दिखा।
फेड से पहले तेल और विदेशी निवेशकों की निकासी पर नजर
ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान की चिंताओं के बीच ब्रेंट क्रूड 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार ने तेल की कीमतों में इस उछाल को अर्थव्यवस्था और बाजारों के लिए बड़ा नकारात्मक कारक बताया।
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को भारतीय इक्विटी में लगभग 3,459 करोड़ रुपये की बिकवाली की, जो बुधवार की 1,407 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी के उलट थी। आंकड़ों में शामिल अक्टूबर के पहले 14 कारोबारी सत्रों में से 11 में वे शुद्ध विक्रेता रहे थे।
अब ध्यान 27–28 अक्टूबर की नीतिगत बैठक पर है, जो फेडरल रिजर्व के आधिकारिक बैठक कैलेंडर में सूचीबद्ध है। कैलेंडर निर्णय की तारीखों की पुष्टि करता है, लेकिन न तो निर्णय का परिणाम बताता है और न ही बाद में ब्याज दर बढ़ने की संभावना स्थापित करता है।
निष्कर्ष
शुक्रवार की रिकवरी ने बेंचमार्क सूचकांकों की गिरावट सीमित की, लेकिन व्यापक बिकवाली से पता चला कि दबाव प्रमुख शेयरों से कहीं आगे तक फैला हुआ था। नजर रखने योग्य अगला पुष्ट नीतिगत कार्यक्रम फेडरल रिजर्व की 27–28 अक्टूबर की बैठक है।
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