भारतीय रुपया 26 अक्टूबर, 2026 को लगातार तीसरे सत्र में गिरा और प्रति अमेरिकी डॉलर 95.1850 पर बंद हुआ, क्योंकि आयातकों ने डॉलर की खरीद बढ़ा दी। सोमवार को मुद्रा 0.3% और तीन सत्रों में लगभग 0.8% कमजोर हुई। ऊंचे तेल मूल्यों और विदेशी इक्विटी निकासी ने भी दबाव बढ़ाया।

मुख्य बातें

  • हाल के समर्थन के स्रोत कमजोर पड़ने के साथ आयातकों की डॉलर मांग ने रुपये पर दबाव डाला।
  • ब्रेंट का भाव लगभग 115 डॉलर प्रति बैरल रहने से भारत की आयात लागत को लेकर चिंताएं बढ़ीं।
  • अब ध्यान फेडरल रिजर्व के 28 अक्टूबर के नीतिगत फैसले पर है।

विषय-सूची

आयातकों की डॉलर खरीद के बीच भारतीय रुपये का समर्थन कमजोर पड़ा

रुपया लगभग अपरिवर्तित खुला, फिर सत्र के दौरान कमजोर होता गया। कारोबारियों ने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक की डॉलर बिक्री और जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ से जुड़ी आवक का समर्थन न मिलने से मुद्रा आयातकों की डॉलर मांग के प्रति अधिक संवेदनशील हो गई।

हाल के सत्रों में इन कारकों ने रुपये को सहारा दिया था। सोमवार के कारोबार का यह विवरण कारोबारियों के आकलन को दर्शाता है, न कि RBI की ओर से उसके हस्तक्षेप की गतिविधि की पुष्टि को।

विनिमय दर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये में बताई जाती है, इसलिए ऊंची दर का मतलब कमजोर रुपया और समान डॉलर भुगतान के लिए अधिक स्थानीय मुद्रा लागत है।

मदविवरण
ब्रेंट में तीन सप्ताह का बदलाव26 अक्टूबर से पहले वाले सप्ताह तक लगभग 13% की बढ़त
अक्टूबर में विदेशी इक्विटी प्रवाह26 अक्टूबर तक लगभग 5 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री
सितंबर में विदेशी इक्विटी प्रवाह3.75 अरब डॉलर की शुद्ध बिक्री

तेल की लागत और विदेशी बिकवाली ने दबाव बढ़ाया

सोमवार को एशियाई कारोबारी घंटों के दौरान ब्रेंट कच्चा तेल लगभग 115 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इसमें लगातार तीन सप्ताह की बढ़त दर्ज हुई थी। सऊदी अरब पर हूती हमलों के बाद आपूर्ति में व्यवधान की चिंताओं ने इस वृद्धि में योगदान दिया।

तेल की ऊंची कीमतों से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है और मुद्रास्फीति का दबाव तेज हो सकता है। इससे कंपनियां मुद्रा हेजिंग बढ़ाने के लिए भी प्रोत्साहित हो सकती हैं, जिससे डॉलर की मांग का एक और संभावित स्रोत जुड़ जाएगा।

विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी के शुद्ध विक्रेता बने रहे। अक्टूबर में निकासी पहले ही सितंबर के कुल स्तर से अधिक हो चुकी थी। ये आंकड़े इक्विटी प्रवाह दर्शाते हैं, भारत में सभी विदेशी निवेश को नहीं।

मिराए एसेट म्यूचुअल फंड में उत्पाद, कारोबारी रणनीति और अंतरराष्ट्रीय कारोबार के प्रमुख वैभव शाह ने आगाह किया कि लंबे समय तक चलने वाला भू-राजनीतिक संघर्ष तेल की कीमतों, मुद्रा और व्यापक आय-वृद्धि की बहाली पर दबाव डालेगा।

फेड का फैसला अगली निर्धारित नीतिगत घटना

फेडरल रिजर्व का अक्टूबर बैठक कैलेंडर नीतिगत बैठक 27–28 अक्टूबर को निर्धारित करता है, इसलिए फैसला बुधवार, 28 अक्टूबर को होगा।

बैठक से पहले व्यापक तौर पर ब्याज दरों में ठहराव की उम्मीद थी और ध्यान भविष्य में ब्याज दरों की दिशा पर केंद्रित था। यह उम्मीद घोषित नीतिगत नतीजा नहीं है; आधिकारिक कैलेंडर बैठक की तारीखें बताता है, फैसला नहीं।

निष्कर्ष

सोमवार को भारतीय रुपया डॉलर की मांग, महंगे तेल और इक्विटी निकासी के दबाव में बंद हुआ। अगली पुष्ट नीतिगत घटना फेडरल रिजर्व का 28 अक्टूबर का फैसला है, जिसमें ब्याज दरों पर अपेक्षित ठहराव और मार्गदर्शन की परीक्षा होगी।

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