भारतीय रुपया 21 अक्टूबर, 2026 को 94.46 प्रति अमेरिकी डॉलर के छह सप्ताह के उच्चतम स्तर पर बंद हुआ। पिछले बंद भाव से इसमें 46 पैसे की मजबूती आई। कारोबारियों ने इस बढ़त का श्रेय Jio Platforms के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) से जुड़े विदेशी पोर्टफोलियो निवेश प्रवाह और डॉलर की नरमी को दिया, हालांकि तेल की बढ़ती कीमतों ने मुद्रा की बढ़त सीमित कर दी।

मुख्य बातें

  • कारोबारियों के अनुसार, Jio Platforms के IPO से जुड़े विदेशी निवेश प्रवाह ने रुपये की रिकवरी को आगे बढ़ाने में मदद की।
  • 10 अक्टूबर को मुद्रा को समर्थन देने के उपायों की घोषणा के बाद से रुपया 230 पैसे मजबूत हुआ था।
  • सत्र के दूसरे हिस्से में तेल की कीमतों के 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने से बढ़त सीमित हुई।

विषय-सूची

भारतीय रुपये की अक्टूबर में रिकवरी जारी

बुधवार की बढ़त ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा 10 अक्टूबर को मुद्रा को समर्थन देने के उपायों की घोषणा के बाद शुरू हुई रिकवरी को आगे बढ़ाया। उस घोषणा के बाद से कुल बढ़त 2.30 रुपये प्रति डॉलर पर पहुंच गई।

यहां विनिमय दरें प्रति अमेरिकी डॉलर रुपये में व्यक्त की गई हैं, इसलिए कम दर रुपये की मजबूती दर्शाती है। कारोबारियों ने कहा कि RBI के हल्के हस्तक्षेप से भी मुद्रा को 94.50 से मजबूत स्तर पर बंद होने में मदद मिली; हस्तक्षेप के बारे में यह बाजार का आकलन था, केंद्रीय बैंक की पुष्टि नहीं।

मदविवरण
कारोबारी सत्र21 अक्टूबर, 2026
दिन के दौरान दायरा94.42–94.82 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर
समापन दर94.46 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर; छह सप्ताह का उच्चतम स्तर
दैनिक बढ़तअमेरिकी डॉलर के मुकाबले 46 पैसे

डॉलर की कमजोरी से मिला दूसरा समर्थन

डॉलर सूचकांक एक दिन पहले के 101.9 से घटकर 101.6 पर आ गया। IPO से जुड़े निवेश प्रवाह के साथ इसने रुपये के लिए एक और सहायक पृष्ठभूमि तैयार की।

ICE की अमेरिकी डॉलर सूचकांक संबंधी व्याख्या के अनुसार, यह छह मुद्राओं की एक टोकरी का ज्यामितीय औसत है, जिसे डॉलर के मुकाबले मापा जाता है। यह बेंचमार्क रुपये के प्रदर्शन का प्रत्यक्ष माप नहीं, बल्कि डॉलर की व्यापक तुलना उपलब्ध कराता है।

तेल की ऊंची कीमतों ने सत्र की बढ़त सीमित की

कारोबार के दूसरे हिस्से में तेल की कीमतें 1.3% बढ़कर 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जाने के कारण रुपये ने अपनी बढ़त का कुछ हिस्सा गंवा दिया। इस तरह सत्र में विदेशी निवेश प्रवाह और डॉलर की कमजोरी से समर्थन मिला, जबकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से दबाव पड़ा।

HDFC Securities के मुद्रा विश्लेषक दिलीप परमार ने रुपये की बढ़त का श्रेय Jio Platforms के IPO और डॉलर सूचकांक की नरमी को दिया। उन्होंने 94.30 प्रति डॉलर को निकट अवधि का समर्थन स्तर बताया—यह मुद्रा का सितंबर का उच्च स्तर था। यह एक विश्लेषक का तकनीकी आकलन है, न कि इस स्तर तक पहुंचने का पूर्वानुमान।

निष्कर्ष

भारतीय रुपया 21 अक्टूबर को छह सप्ताह के अपने सबसे मजबूत समापन स्तर पर बंद हुआ, लेकिन तेल की कीमतें बढ़ने से दिन के कारोबार में मिली बढ़त का कुछ हिस्सा गंवा दिया। आगे के कारोबार से पता चलेगा कि IPO से जुड़े निवेश प्रवाह और डॉलर की कमजोरी इस दबाव की भरपाई जारी रख पाते हैं या नहीं।

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