भारतीय रुपया 16 अक्टूबर, 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.96 पर बंद हुआ। भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के उपायों से हाजिर बाजार में डॉलर की मांग घटने के बीच मुद्रा ने सप्ताह में लगभग 1.9% की बढ़त दर्ज की। कारोबारियों के अनुसार, 8 सितंबर के बाद यह पहला मौका था जब रुपया 95 से नीचे बंद हुआ और सात महीनों में इसकी सबसे बड़ी साप्ताहिक बढ़त रही।
मुख्य बातें
- पिछले सप्ताह के अंतिम बंद भाव 96.73 प्रति डॉलर से रुपया मजबूत हुआ।
- RBI ने सरकारी तेल विपणन कंपनियों की डॉलर मांग को अलग, विदेशी मुद्रा भंडार से वित्तपोषित विंडो में स्थानांतरित किया।
- कम कारोबार वाले बाजार में कॉरपोरेट क्षेत्र की डॉलर खरीद ने शुक्रवार की शुरुआती बढ़त को कम कर दिया।
विषय-सूची
- भारतीय रुपया बंद भाव पर 95 से नीचे
- RBI ने तेल कंपनियों की डॉलर मांग को अलग किया
- कमजोर डॉलर से मदद, लेकिन फॉरवर्ड प्रीमियम ऊंचे
- निष्कर्ष
भारतीय रुपया बंद भाव पर 95 से नीचे
सप्ताह की शुरुआत में रुपया 95 से नीचे कारोबार कर चुका था, लेकिन शुक्रवार को 38 दिनों में पहली बार वह इस स्तर से नीचे बंद हुआ। कॉरपोरेट क्षेत्र की डॉलर मांग ने उसे दिन के सबसे मजबूत स्तर से वापस खींच लिया, जिससे गुरुवार के 95.05 के बंद भाव के मुकाबले बढ़त घट गई।
फेडरल रिज़र्व की 19 अक्टूबर की H.10 विज्ञप्ति में भारतीय रुपये की विनिमय-दर श्रृंखला रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर के रूप में दी गई है। इस कोटेशन के आधार पर कम संख्या का अर्थ है मजबूत रुपया; फेड के आंकड़े यहां चर्चा किए गए भारतीय बाजार के बंद भाव से अलग हैं।
| मद | विवरण |
|---|---|
| शुक्रवार का शुरुआती भाव | 94.71 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर |
| शुक्रवार का दिन का सबसे मजबूत स्तर | 94.67 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर |
| उल्लेखित रिकॉर्ड कमजोर स्तर | 20 मई को 96.96 रुपये प्रति अमेरिकी डॉलर |
RBI ने तेल कंपनियों की डॉलर मांग को अलग किया
RBI ने इंडियन ऑयल कॉर्प, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प और भारत पेट्रोलियम कॉर्प को अपने विदेशी मुद्रा भंडार से डॉलर उपलब्ध कराने के लिए एक अलग विंडो खोली। इससे उनकी मांग हाजिर बाजार से हट गई और वहां डॉलर खरीद का एक स्रोत घटा—हालांकि कंपनियों की अंतर्निहित मुद्रा जरूरतें समाप्त नहीं हुईं।
केंद्रीय बैंक की सट्टा दांवों पर कार्रवाई के बीच कारोबार की मात्रा कम बनी रही। HDFC सिक्योरिटीज के वरिष्ठ शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने सप्ताह के दौरान मुद्रा की मजबूती का श्रेय RBI के बचाव उपायों और जोखिम वाली परिसंपत्तियों में आई तेजी, दोनों को दिया।
कमजोर डॉलर से मदद, लेकिन फॉरवर्ड प्रीमियम ऊंचे
डॉलर सूचकांक 0.3% गिरकर 101.7 पर आ गया, जबकि अधिकांश एशियाई मुद्राएं मजबूत हुईं। इस व्यापक रुझान के साथ रुपये में बढ़त दर्ज हुई, हालांकि उपलब्ध साक्ष्य से प्रत्येक कारक के योगदान को अलग-अलग निर्धारित नहीं किया जा सकता।
एक निजी बैंक के ट्रेजरी प्रमुख ने कहा कि कड़ी तरलता और ऊंची बॉन्ड यील्ड के कारण फॉरवर्ड प्रीमियम ऊंचे बने रहे और गुरुवार से उनमें बहुत कम बदलाव हुआ। इसलिए हाजिर विनिमय दर में सुधार के साथ फॉरवर्ड बाजार की स्थितियों में वैसी ही नरमी नहीं आई।
निष्कर्ष
अगले कारोबारी सत्र में यह परखा जाएगा कि रुपया 95 से नीचे अपना बंद स्तर कायम रख पाता है या नहीं। शुक्रवार को RBI की अलग तेल-कंपनी विंडो से हाजिर बाजार पर दबाव घटने के बावजूद कॉरपोरेट डॉलर मांग ने बढ़त सीमित कर दी थी।
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