अप्रैल–सितंबर 2026 में भारत के ईंधन निर्यात से ₹2.59 लाख करोड़ की कमाई हुई, जो रुपये के हिसाब से एक साल पहले की तुलना में लगभग 50% अधिक थी, जबकि शिपमेंट मात्रा 16% घट गई। अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी से डॉलर में कमाई बढ़ी, जबकि रुपये में कमजोरी ने घरेलू मुद्रा में इन प्राप्तियों का मूल्य और बढ़ा दिया।
मुख्य बातें
- डॉलर के हिसाब से निर्यात से कमाई लगभग 40% बढ़ी, जिससे पता चलता है कि अधिक प्राप्तियां केवल मुद्रा विनिमय के प्रभाव का नतीजा नहीं थीं।
- डीजल और पेट्रोल का संयुक्त रूप से रुपये के हिसाब से पेट्रोलियम निर्यात से हुई कमाई में लगभग 70% हिस्सा था।
- घरेलू खपत में बढ़ोतरी और उत्पादन में मामूली कमी से निर्यात के लिए उपलब्ध अधिशेष घट गया।
कीमतों और मुद्रा से भारत के ईंधन निर्यात को लाभ
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 को समाप्त छह महीनों के दौरान कम शिपमेंट के बावजूद निर्यात से प्राप्तियां बढ़ीं। क्षेत्रीय बेंचमार्क कीमतों में एक साल पहले की तुलना में डीजल के लिए औसतन 83% और पेट्रोल के लिए 54% की बढ़ोतरी हुई।
रुपये का औसत मूल्य प्रति डॉलर 95.17 रहा, जबकि अप्रैल–सितंबर 2025 में यह 86.44 था। रुपये के मूल्य में इस गिरावट से डॉलर में निर्धारित निर्यात आय का रुपया मूल्य बढ़ा, जिससे यह समझने में मदद मिलती है कि घरेलू मुद्रा में प्राप्तियों की वृद्धि डॉलर में प्राप्तियों की वृद्धि से अधिक क्यों रही।
पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल का पेट्रोलियम व्यापार डेटा ढांचा शिपमेंट की मात्रा को रुपये और अमेरिकी डॉलर में मूल्य से अलग रखता है। ये माप व्यापार के अलग-अलग पहलुओं को दर्शाते हैं: निर्यात से अधिक प्राप्तियों का यह अर्थ जरूरी नहीं कि विदेशों में अधिक ईंधन बेचा गया हो, और प्राप्तियां रिफाइनरियों के मुनाफे का माप नहीं हैं।
| मद | विवरण |
|---|---|
| अप्रैल–सितंबर 2026 में डीजल निर्यात से प्राप्तियां | लगभग ₹1.2 लाख करोड़ |
| अप्रैल–सितंबर 2026 में पेट्रोल निर्यात से प्राप्तियां | ₹58,000 करोड़ |
| क्षेत्रीय डीजल बेंचमार्क का औसत | $151 प्रति बैरल |
| क्षेत्रीय पेट्रोल बेंचमार्क का औसत | $120 प्रति बैरल |
निर्यात प्राप्तियों में बढ़ोतरी की अगुवाई डीजल ने की
शिपमेंट मात्रा में 19% की गिरावट के बावजूद डीजल निर्यात से कमाई रुपये के हिसाब से 58% और डॉलर के हिसाब से 48% बढ़ी। पेट्रोल से प्राप्तियां रुपये में 21% और डॉलर में 13% बढ़ीं, जबकि मात्रा 24% घट गई।
शिपमेंट मात्रा के लिहाज से डीजल सबसे बड़ा उत्पाद भी था। पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में इसका हिस्सा 42% था, जिसके बाद पेट्रोल का हिस्सा 23% रहा। भारत के अन्य प्रमुख ईंधन निर्यातों में जेट ईंधन, नेफ्था और ईंधन तेल शामिल हैं।
घरेलू मांग से निर्यात अधिशेष सीमित
अप्रैल–सितंबर के दौरान घरेलू डीजल खपत 5% बढ़ी, जबकि पेट्रोल की खपत में 7% की बढ़ोतरी हुई। इसके उलट उत्पादन में डीजल के लिए 0.3% और पेट्रोल के लिए 0.8% की गिरावट आई। उद्योग के एक अधिकारी ने घरेलू अधिशेष में आई परिणामी कमी को निर्यात मात्रा घटने का कारण बताया।
भारत के ईंधन निर्यात में रिलायंस इंडस्ट्रीज का हिस्सा लगभग 70% है; शेष आपूर्ति नायरा एनर्जी, MRPL और अन्य रिफाइनरियां करती हैं।
निर्यात से अधिक कमाई भारत की तेल आयात पर निर्भरता की भरपाई केवल आंशिक रूप से करती है। घरेलू खपत का लगभग 90% आयातित कच्चे तेल से पूरा होता है, और कच्चे तेल तथा ईंधन के आयात पर खर्च किए गए डॉलर का लगभग एक-चौथाई हिस्सा निर्यात के जरिये वापस आता है।
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