Bandhan AMC में फिक्स्ड इनकम के मुख्य निवेश अधिकारी सुयश चौधरी ने कहा कि अगर वैश्विक पूंजी के लिए प्रतिस्पर्धा और कमोडिटी कीमतों का दबाव बना रहता है, तो अगले कुछ महीनों में भारत में बॉन्ड यील्ड और बढ़ सकती है।
मुख्य बातें
- चौधरी का अनुमान है कि मौजूदा दबाव जारी रहने पर भारतीय ब्याज दरों में और बढ़ोतरी होगी।
- उनका अनुमान है कि अमेरिकी फेडरल रिज़र्व ब्याज दरों में 50 आधार अंकों की और बढ़ोतरी करेगा, हालांकि AI निवेश में गिरावट से परिदृश्य बदल सकता है।
- उन्होंने सितंबर के डेट म्यूचुअल फंड से हुए अधिकांश निकास का कारण मौसमी कारकों को बताया।
भारत में बॉन्ड यील्ड को क्या बढ़ा सकता है
चौधरी ने कहा कि वैश्विक वास्तविक यील्ड में बढ़ोतरी पूंजी के लिए मजबूत प्रतिस्पर्धा को दर्शाती है, जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण की मांग भी शामिल है। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र के खर्च में वृद्धि ऐसे समय हो रही है, जब प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी राजकोषीय घाटे पहले से ही ऊंचे हैं।
उन्होंने पश्चिम एशिया युद्ध और अस्थिर मौसम से जुड़े व्यापक कमोडिटी मूल्य दबावों का भी उल्लेख किया। उनके आकलन में, इन कारकों के संयुक्त प्रभाव से भारतीय ब्याज दरों की अपेक्षाएं बढ़ रही हैं। उनका परिदृश्य इन दबावों के जारी रहने पर निर्भर करता है; यह किसी विशिष्ट यील्ड स्तर का पूर्वानुमान नहीं है।
फेड का परिदृश्य और घरेलू नीति
27 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित टिप्पणियों में, फेडरल रिज़र्व की 27–28 अक्टूबर की बैठक से पहले, चौधरी ने कहा कि अमेरिका की सुदृढ़ आर्थिक वृद्धि और कमोडिटी कीमतों के दबाव ने केंद्रीय बैंक को मुद्रास्फीति पर ध्यान केंद्रित करने की गुंजाइश दी। उनका अनुमान है कि फेड ब्याज दरों में 50 आधार अंकों की और बढ़ोतरी करेगा, जो उनके अनुसार मोटे तौर पर बाजार की अपेक्षाओं के अनुरूप थी।
उन्होंने कहा कि AI के कार्यान्वयन में बड़ी गिरावट से आर्थिक वृद्धि प्रभावित हो सकती है और यह परिदृश्य बदल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक पूंजी की मांग, नीतिगत फैसले लेते समय भारतीय रिज़र्व बैंक के पास उपलब्ध गुंजाइश को प्रभावित करती है, साथ ही रुपये और पूंजी प्रवाह पर भी दबाव डालती है।
डेट फंड प्रवाह और निवेश जोखिम
सितंबर में डेट म्यूचुअल फंड से ₹1.83 लाख करोड़ का शुद्ध निकास दर्ज किया गया। चौधरी ने कहा कि निकासी का अधिकांश हिस्सा मौसमी कारकों के कारण था।
उन्होंने कहा कि फिक्स्ड डिपॉजिट, सरकारी प्रतिभूतियों और डेट म्यूचुअल फंड में से चुनने से पहले निवेशकों को यह विचार करना चाहिए कि वे अवधि और क्रेडिट जोखिम कितना लेना चाहते हैं। उनका मत है कि स्थिर संतुलन बनने तक इन दोनों जोखिमों के प्रति सतर्क रुख अपनाना चाहिए।
अगला महत्वपूर्ण पड़ाव
अगला निर्धारित नीतिगत पड़ाव फेड की 27–28 अक्टूबर की बैठक थी।
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