Argus Media के अनुसार, एशियाई समुद्री व्यापार में इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल की बेंचमार्क कीमतें 2026 में 27 अक्टूबर तक लगभग 10% बढ़ चुकी थीं; मई में वे रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची थीं। भारत में, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए टिकाऊ विमानन ईंधन की अनिवार्यता लागू करने की तैयारी के बीच रिफाइनरियां इस अपशिष्ट तेल की आपूर्ति तलाश रही हैं।
मुख्य बातें
- Hindustan Petroleum और Bharat Petroleum ने अक्टूबर में बंद होने वाले टेंडरों के तहत कुल 83,000 टन इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल की मांग की है।
- जनवरी 2027 से भारत की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 1% टिकाऊ विमानन ईंधन युक्त ईंधन का इस्तेमाल होना है।
- संग्रहकर्ताओं को बिखरी हुई आपूर्ति शृंखला और इस बात की पुष्टि करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है कि अपशिष्ट के रूप में बेचा जा रहा तेल वास्तव में इस्तेमाल किया जा चुका है।
इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल की मांग बिखरी हुई रसोइयों तक पहुंचती है
Indian Oil, Hindustan Petroleum और Bharat Petroleum ऐसे इस्तेमाल किए गए कुकिंग ऑयल की तलाश कर रही हैं जिसे जैव ईंधन में बदला जा सके। बाद की दोनों कंपनियों के टेंडर अक्टूबर 2026 में बंद होंगे; Indian Oil ने वर्ष की शुरुआत में एक छोटा टेंडर जारी किया था। टेंडर में बताई गई मात्रा आपूर्ति के अनुरोध हैं, पुष्ट खरीद नहीं।
भारत में हर साल लगभग 3 मिलियन टन इस्तेमाल किया हुआ तेल पैदा होता है, लेकिन देश में कोई केंद्रीकृत संग्रह प्रणाली नहीं है। India’s SAF Association के अनुसार, इसका केवल लगभग 5% ही एकत्र किया जाता है। बड़ी मात्रा जुटाने के लिए संग्रहकर्ताओं को अलग-अलग रेस्तरां, होटलों और खाद्य कारखानों में जाना पड़ता है।
बेंचमार्क कीमत में वृद्धि बाजार में दर्ज किया गया बदलाव है। हालांकि रिफाइनरियां अधिक आपूर्ति तलाश रही हैं और संग्रह करना कठिन है, उपलब्ध जानकारी से कीमतों में इस वृद्धि का कोई विशिष्ट कारण स्थापित नहीं होता।
विमानन ईंधन की अनिवार्यता नजदीक
जनवरी 2027 से भारत से रवाना होने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में 1% टिकाऊ विमानन ईंधन (SAF) युक्त ईंधन का इस्तेमाल करना होगा। यह अनिवार्यता 2030 तक बढ़कर 5% होने वाली है; इसी के साथ सड़क परिवहन के लिए 5% बायोडीजल का लक्ष्य भी है।
S&P Global का अनुमान है कि दशक के अंत तक भारत की SAF मांग 250,000 टन तक पहुंच जाएगी। यह मौजूदा खपत नहीं, बल्कि एक पूर्वानुमान है।
संग्रहकर्ताओं का विस्तार, लेकिन स्रोत का पता लगाने की चुनौती बरकरार
M11 Energy Transition के मुख्य कार्यकारी Mannan Khan ने कहा कि कंपनी के 24 शहरों में 300 संग्रहकर्ता हैं, जो हर महीने लगभग 1,000 टन तेल जुटाते हैं। उनकी योजना 2026 के अंत तक डिपो की संख्या दोगुनी करके 50 करने और अपने संग्रह मार्गों में घरों, खाद्य निर्माताओं तथा औद्योगिक रसोइयों को शामिल करने की है।
Münzer Bharat भारत के 20 से अधिक शहरों में हर महीने लगभग 900 टन तेल एकत्र करती है। कंपनी के ट्रेडिंग प्रमुख Jatin Udwadia ने कहा कि भारत को अपनी SAF अनिवार्यता पूरी करने में संगठित आपूर्तिकर्ताओं की भूमिका है।
तेल वास्तव में इस्तेमाल किया हुआ है, यह स्थापित करने में मदद के लिए संग्रहकर्ता अपनी खरीद का दस्तावेजीकरण करते हैं। आपूर्ति शृंखला में सामग्री आगे बढ़ने के साथ सत्यापन कठिन हो सकता है, खासकर तब जब अपशिष्ट तेल ताजे तेल से अधिक मूल्यवान हो।
अगला पड़ाव
अगला पुष्ट पड़ाव भारत से रवाना होने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए 1% टिकाऊ विमानन ईंधन की अनिवार्यता जनवरी 2027 में शुरू होना है।
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