रॉबर्ट एल्सवर्थ की वसीयत में मैनहट्टन के डोनोह्यूज़ स्टेक हाउस की दो वेट्रेस को 50,000 डॉलर each दिए गए। कला व्यापारी लगभग 50 वर्षों तक इस रेस्तरां में नियमित रूप से आते रहे थे। दोनों महिलाओं को इन वसीयतों के बारे में 2015 में पता चला, जब 2014 में 85 वर्ष की आयु में एल्सवर्थ का निधन हो गया था।

मुख्य बातें

  • मॉरीन डोनोह्यू-पीटर्स और उनकी भतीजी मॉरीन बैरी—दोनों को 50,000 डॉलर दिए गए।
  • एल्सवर्थ एशियाई प्राचीन वस्तुओं और मिंग राजवंश के फर्नीचर के लिए जाने जाने वाले कला व्यापारी थे।

रॉबर्ट एल्सवर्थ की वसीयत में वेट्रेस के नाम क्यों शामिल किए गए

एल्सवर्थ पाँच दशकों तक डोनोह्यूज़ स्टेक हाउस के वफादार ग्राहक रहे। डोनोह्यू-पीटर्स ने उन्हें सहज और मददगार बताया और कहा कि वे कर्मचारियों को उनके नाम से जानते थे।

वे अक्सर 8.95 डॉलर का खुला बेकन और चीज़ सैंडविच मंगाते थे और बिल देखे बिना 20% टिप देने के लिए जाने जाते थे। उपलब्ध स्रोत में यह नहीं बताया गया है कि उन्होंने दोनों महिलाओं को अपनी वसीयत में शामिल करने का फैसला क्यों किया।

एशियाई कला में करियर

“मिंग के राजा” के नाम से मशहूर एल्सवर्थ एशियाई प्राचीन वस्तुओं का संग्रह करते थे और मिंग राजवंश के फर्नीचर तथा आधुनिक चीनी कलाकृतियों का कारोबार करते थे। उन्होंने 19 वर्ष की उम्र में प्राचीन वस्तुओं का व्यापार शुरू किया और 1959 में अपनी दुकान खोली।

उनके साथी और रेस्तरां व्यवसायी मासाहिरो हाशिगुची ने बाद में वसीयत की व्यवस्थाओं को चुनौती दी और एक प्रतिद्वंद्वी वसीयत दायर की। उपलब्ध विवरण से इस विवाद का नतीजा स्पष्ट नहीं होता।

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