पुलिस की चार्जशीट के अनुसार, मुंबई में CSR जांच के तहत करीब 30 बैंक खातों में लगभग ₹188 करोड़ के लेन-देन की पड़ताल की जा रही है। ये खाते ट्रस्टों, फाउंडेशनों और उन कंपनियों से जुड़े हैं जिनका संबंध उस व्यक्ति से है जिस पर करीब तीन दशक तक डॉक्टर बनकर रहने का आरोप है।
मुख्य बातें
- पुलिस का आरोप है कि CSR निधियों और दान को कर्मचारियों, रिश्तेदारों, न्यासियों और अन्य लाभार्थियों को हस्तांतरित किया गया।
- चार्जशीट के अनुसार, तपेदिक जांच परियोजना के लिए जांचे गए 543 लाभार्थी रिकॉर्ड में से 520 का सत्यापन जांचकर्ता नहीं कर सके।
मुंबई की CSR जांच में विभिन्न संस्थाओं के बीच धन के लेन-देन का पता लगाया जा रहा है
चार्जशीट में आरोप लगाया गया है कि धर्मेंद्रकुमार सिंह ने स्वास्थ्य सेवा से जुड़ी परियोजनाओं के लिए कई संस्थाओं के माध्यम से कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) की निधियां और दान जुटाए। जांचकर्ताओं ने पाया कि प्राप्ति के कुछ ही दिनों के भीतर बड़ी रकम दूसरे खातों में हस्तांतरित कर दी गई।
पुलिस एक धर्मार्थ ट्रस्ट और उससे जुड़ी कंपनियों के बीच हस्तांतरण की जांच कर रही है। इनमें कर्मचारियों के वेतन के भुगतान और सिंह के रिश्तेदारों, न्यासियों तथा अन्य संस्थाओं को किए गए हस्तांतरण शामिल हैं। ₹188 करोड़ का आंकड़ा जांच के दायरे में आए लेन-देन को दर्शाता है, न कि इस निष्कर्ष को कि पूरी रकम का दुरुपयोग हुआ।
चार्जशीट के अनुसार, सिंह ने 12वीं कक्षा तक पढ़ाई की और पहले बिहार में अस्पताल सहायक के रूप में काम किया था। कथित तौर पर उसके द्वारा इस्तेमाल की गई संस्थाओं में R K HIV AIDS Research and Care Centre और Doctor 365 Health Services Private Limited शामिल थीं।
तपेदिक परियोजना के रिकॉर्ड जांच के दायरे में
चार्जशीट में आरोप है कि R K HIV AIDS Research and Care Centre ने कोल इंडिया की सहायक कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड से ₹3.82 करोड़ की तपेदिक जांच परियोजना के लिए मंजूरी हासिल की थी। इस परियोजना का लक्ष्य 50,000 लोगों तक पहुंचना था। ट्रस्ट को फरवरी 2025 में ₹38.25 लाख की पहली किस्त मिली।
बिलासपुर के लाभार्थी रिकॉर्ड की जांच करते समय, जांचकर्ताओं ने पाया कि जांचे गए 543 रिकॉर्ड में से 520 का आधार सत्यापन के जरिए सत्यापन नहीं हो सका। इससे यह संदेह पैदा हुआ कि जमा किए गए आंकड़े गढ़े हुए हो सकते हैं।
जुलाई में तलाशी के दौरान मुंबई क्राइम ब्रांच ने दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों, चेक बुकों, कंप्यूटरों और दस्तावेजों समेत 220 वस्तुएं जब्त कीं। बताया गया कि कुछ दवाइयां एक्सपायर हो चुकी थीं या उन पर सरकारी आपूर्ति के लिए और बिक्री के लिए नहीं होने का लेबल लगा था।
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