इंडियन माल्ट व्हिस्की एसोसिएशन और स्कॉच व्हिस्की एसोसिएशन ने स्थिरता, उत्पाद संरक्षण और प्रचार तथा आपसी हित के विनियामक मामलों को शामिल करते हुए एक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

भारतीय माल्ट व्हिस्की समझौते में प्रामाणिकता और विनियमन शामिल

दोनों उद्योग निकायों ने एक संयुक्त बयान में कहा कि वे कानूनी संरक्षण, उत्पाद की प्रामाणिकता, बौद्धिक संपदा के उल्लंघनों और जिम्मेदार उपभोग के मुद्दों पर सहयोग करेंगे।

जुलाई 2024 में एक गैर-लाभकारी उद्योग निकाय के रूप में स्थापित भारतीय एसोसिएशन, भारतीय माल्ट व्हिस्की उत्पादकों का प्रतिनिधित्व करता है और गुणवत्ता, प्रामाणिकता तथा मानकीकरण को बढ़ावा देने के लिए काम करता है।

व्यापार समझौते ने तैयार की पृष्ठभूमि

यह सहयोग समझौता भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते के बाद हुआ है, जो 15 जुलाई, 2026 को लागू हुआ। व्यापार समझौते से आयात शुल्क 150% से घटाकर 75% किए जाने और अगले दशक में चरणबद्ध तरीके से 40% तक लाए जाने के कारण भारत में स्कॉच की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।

व्यापार समझौता ब्रिटेन में भारतीय सिंगल माल्ट व्हिस्की के लिए अवसर भी पैदा कर सकता है। एसोसिएशनों ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच गहरा जुड़ाव संवाद, ज्ञान के आदान-प्रदान और दोनों बाजारों में अवसरों का लाभ उठाने में कारोबारों की मदद कर सकता है।

स्कॉच व्हिस्की एसोसिएशन ने कहा कि 2025 में मात्रा के लिहाज से भारत स्कॉच व्हिस्की का सबसे बड़ा निर्यात बाजार था, जहां 220 मिलियन से अधिक बोतलों के बराबर खेप भेजी गई। एसोसिएशन ने कहा कि पिछले दशक में भारत भेजी गई मात्रा दोगुनी हो गई थी।

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