भारत-पाकिस्तान विवाद 24 अक्टूबर, 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा की एक समिति के अल्पसंख्यक अधिकारों पर संवाद में उठा, जब एक भारतीय राजनयिक ने पाकिस्तान पर प्रचार फैलाने का आरोप लगाया और कहा कि उसकी सरकार देश की सेना को दरकिनार नहीं कर सकती।
मुख्य बातें
- भारतीय राजनयिक रघू पुरी ने अल्पसंख्यक मुद्दों पर संयुक्त राष्ट्र के विशेष प्रतिवेदक के साथ संवाद के दौरान भारत की आलोचना करने पर पाकिस्तान को चुनौती दी।
- पुरी ने “फॉर्म 47 सरकार” शब्द का इस्तेमाल किया—यह वाक्यांश उन आलोचकों द्वारा इस्तेमाल किया जाता है जो पाकिस्तान के 2024 के चुनाव में हेरफेर का आरोप लगाते हैं।
- उन्होंने जम्मू-कश्मीर पर भारत का रुख भी दोहराया—यह ऐसा क्षेत्र है जिसका मुद्दा पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अक्सर उठाता है।
संयुक्त राष्ट्र में भारत-पाकिस्तान विवाद
भारत के संयुक्त राष्ट्र मिशन में प्रथम सचिव रघू पुरी ने कहा कि पाकिस्तान अपने घरेलू मामलों की चुनौतियों से ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना का सरकार पर वास्तविक नियंत्रण है और अल्पसंख्यक अधिकारों के मामले में पाकिस्तान के रिकॉर्ड पर सवाल उठाया।
पुरी ने जम्मू-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के दावों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र भारत का अभिन्न अंग है और लंबित मुद्दा उन इलाकों को खाली करना है जिन्हें भारत पाकिस्तान के अवैध कब्जे में मानता है।
फॉर्म 47 के संदर्भ का क्या अर्थ है
फॉर्म 47 पाकिस्तान का एक चुनावी दस्तावेज़ है, जिसमें किसी निर्वाचन क्षेत्र के अनंतिम समेकित नतीजे दर्ज होते हैं। आलोचकों ने फरवरी 2024 के आम चुनाव के आधिकारिक नतीजे पर सवाल उठाने के लिए “फॉर्म 47 सरकार” शब्द का इस्तेमाल किया है। इस चुनाव के साथ धांधली और अनियमितताओं के आरोप भी लगे थे।
अल्पसंख्यक मुद्दों पर रिपोर्ट को संबोधित करते हुए पुरी ने कहा कि अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा करना मुख्य रूप से अलग-अलग देशों की जिम्मेदारी है। उन्होंने धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों के लिए भारत के संवैधानिक संरक्षणों का उल्लेख किया और कहा कि भारत बहुपक्षीय मंचों पर चर्चा के लिए तैयार है।
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