भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने डिबेंचर ट्रस्टी की समयसीमा छह महीने बढ़ाकर 27 अप्रैल 2027 कर दी है। इससे पंजीकृत ट्रस्टियों को नियामक के दायरे से बाहर की गतिविधियों को अलग कारोबारी इकाइयों में विभाजित करने के लिए अधिक समय मिलेगा।
डिबेंचर ट्रस्टी की समयसीमा और दायरा
27 अक्टूबर 2026 को घोषित यह समयविस्तार सेबी डिबेंचर ट्रस्टी विनियम, 1993 के विनियम 9C के तहत आवश्यकताओं पर लागू होता है। इस प्रावधान के अनुसार, वैध पंजीकरण प्रमाणपत्र वाले ट्रस्टी को सेबी द्वारा विनियमित नहीं की जाने वाली गतिविधियां अलग कारोबारी इकाइयों में स्थानांतरित करनी होंगी।
सेबी ने डिबेंचर ट्रस्टियों के लिए अनुमत गतिविधियों को स्पष्ट करने हेतु 27 अक्टूबर 2025 को अधिसूचित संशोधनों के माध्यम से यह प्रावधान लागू किया था।
समीक्षा और कार्यान्वयन की चुनौतियां
ट्रस्टियों को शुरुआत में अनुपालन के लिए छह महीने दिए गए थे। अप्रैल 2026 में, आवश्यक प्रणालियां और प्रक्रियाएं स्थापित करने में परिचालन संबंधी चुनौतियों का हवाला देते हुए उद्योग जगत से मिले अभ्यावेदनों के बाद सेबी ने समयसीमा बढ़ाकर 27 अक्टूबर 2026 कर दी थी।
नवीनतम समयविस्तार के लिए सेबी ने जून 2026 में गठित विशेषज्ञ कार्य समूह द्वारा की जा रही व्यापक समीक्षा का हवाला दिया। यह समूह डिबेंचर ट्रस्टीशिप के नियामकीय ढांचे की जांच कर रहा है, जिसमें अलग कारोबारी इकाई का ढांचा भी शामिल है।
नियामक ने दिशानिर्देशों को लागू करने में आने वाली चुनौतियों के बारे में डिबेंचर ट्रस्टी संघों से मिले आगे के अभ्यावेदनों पर भी विचार किया।
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