सितंबर तिमाही के नतीजों के बाद ICICI Bank को HDFC Bank की तुलना में ब्रोकरेज का अधिक समर्थन मिला। विश्लेषकों ने ICICI की मुनाफे में वृद्धि और परिसंपत्ति गुणवत्ता को तरजीह दी, जबकि HDFC को अधिकतर रिकवरी की संभावना के रूप में देखा। हालांकि, दोनों भारतीय ऋणदाताओं के शेयर 19 अक्टूबर, 2026 को व्यापक बाजार में गिरावट के साथ नीचे बंद हुए।
मुख्य बातें
- ICICI Bank का स्टैंडअलोन तिमाही मुनाफा 20.1% बढ़ा, जबकि गैर-निष्पादित ऋण अनुपात घटे।
- ब्रोकरेज HDFC Bank को लेकर सकारात्मक बने रहे, लेकिन उनका दृष्टिकोण अपेक्षित आय रिकवरी पर अधिक निर्भर था।
- ब्रोकरेज के अनुकूल आकलन के बावजूद 19 अक्टूबर को दोनों शेयरों में गिरावट आई।
विषय-सूची
- कम मार्जिन के बावजूद ICICI Bank के नतीजों में वृद्धि
- HDFC Bank के समर्थन का आधार रिकवरी की उम्मीदें
- सकारात्मक ब्रोकरेज राय से अलग शेयर कीमतों की चाल
- निष्कर्ष
कम मार्जिन के बावजूद ICICI Bank के नतीजों में वृद्धि
ICICI Bank ने 30 सितंबर, 2026 को समाप्त तिमाही के लिए ₹14,843 करोड़ का स्टैंडअलोन कर-पश्चात मुनाफा दर्ज किया। यह वित्त वर्ष 2027 की दूसरी तिमाही थी। एक साल पहले यह मुनाफा ₹12,359 करोड़ था।
बैंक की सितंबर तिमाही की प्रदर्शन समीक्षा के अनुसार, मुख्य परिचालन मुनाफा 21.8% बढ़कर ₹20,805 करोड़ और शुद्ध ब्याज आय 17.7% बढ़कर ₹25,339 करोड़ हो गई। परिचालन खर्च इससे धीमी गति से, 8.5% बढ़ा।
यह वृद्धि शुद्ध ब्याज मार्जिन में कमी के बावजूद हुई। यह मार्जिन ब्याज अर्जित करने वाली परिसंपत्तियों पर मिलने वाले ब्याज के अंतर को मापता है। मार्जिन 4.18% रहा, जबकि पिछली तिमाही में यह 4.36% और एक साल पहले 4.30% था। पिछली तिमाही में कर रिफंड पर ब्याज से आठ आधार अंकों का लाभ मिला था, जबकि सितंबर तिमाही में यह लाभ नगण्य था।
परिसंपत्ति गुणवत्ता के मापदंडों में सुधार हुआ। सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्ति अनुपात जून के 1.38% और एक साल पहले के 1.58% से घटकर 1.20% रह गया। शुद्ध अनुपात क्रमशः 0.35% और 0.39% से घटकर 0.30% हो गया।
| मद | विवरण |
|---|---|
| ICICI Bank के शेयर | 19 अक्टूबर, 2026 को ₹1,382 पर बंद हुए, 1.1% नीचे। |
| HDFC Bank के शेयर | 19 अक्टूबर, 2026 को ₹712 पर बंद हुए, 2.3% नीचे। |
| Nifty | इसी कारोबारी सत्र में 1.11% गिरा। |
| Bank Nifty | इसी कारोबारी सत्र में 0.6% गिरा। |
HDFC Bank के समर्थन का आधार रिकवरी की उम्मीदें
मुनाफे में मामूली वृद्धि और मार्जिन पर दबाव के बाद ब्रोकरेज ने HDFC Bank का अधिक सतर्क आकलन किया। उनका सकारात्मक दृष्टिकोण आंशिक रूप से आय में रिकवरी और नेतृत्व परिवर्तन के बीच बेहतर क्रियान्वयन की उम्मीदों पर आधारित था, न कि मौजूदा तिमाही की उतनी ही मजबूत गति पर।
अल्पसंख्यक हित घटाने के बाद HDFC Bank का समेकित शुद्ध मुनाफा ₹20,700.03 करोड़ रहा, जबकि एक साल पहले यह ₹19,610.67 करोड़ था। यह लगभग 5.6% की वृद्धि है। इन समूह-स्तरीय आंकड़ों में सहायक कंपनियां शामिल हैं और इनकी तुलना ICICI Bank के स्टैंडअलोन मुनाफे से सीधे तौर पर नहीं की जानी चाहिए।
नतीजों और उम्मीदों के बीच का अंतर महत्वपूर्ण है: HDFC की अपेक्षित रिकवरी अब भी विश्लेषकों का नजरिया है, पूरा हो चुका सुधार नहीं। ICICI की अधिक मजबूत रिपोर्टेड वृद्धि और खराब ऋण अनुपात में कमी ने अनुकूल आकलन के लिए अधिक तत्काल आधार दिया।
सकारात्मक ब्रोकरेज राय से अलग शेयर कीमतों की चाल
अनुकूल आकलन के बावजूद 19 अक्टूबर के कारोबारी सत्र में शेयरों में बढ़त नहीं हुई। Nifty और Bank Nifty भी नीचे बंद हुए और दोनों ऋणदाताओं के शेयरों में गिरावट आई।
इन एक-साथ हुई गिरावटों से किसी भी शेयर की चाल का एकमात्र कारण तय नहीं होता। ब्रोकरेज की सिफारिशें उम्मीदों को दर्शाती हैं, जबकि बंद भाव उस दिन के कारोबार का नतीजा होते हैं।
निष्कर्ष
नतीजों के बाद मुख्य अंतर ICICI की प्रदर्शित आय वृद्धि और HDFC की अपेक्षित रिकवरी के बीच था। आगे की तिमाही घोषणाएं यह परखेंगी कि क्या मार्जिन पर दबाव कम होता है और ऋण गुणवत्ता मजबूत बनी रहती है; किसी रिकवरी को सुनिश्चित नहीं मानना चाहिए।
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