Google ने 15 अक्टूबर, 2026 को घोषणा की कि उसके Willow क्वांटम प्रोसेसर पर किए गए एक प्रयोग में मैजिक स्टेट कल्टिवेशन ने त्रुटियों को लगभग 40 गुना घटा दिया। Alphabet की इस सहायक कंपनी ने विशेष रूप से तैयार किए गए क्वांटम स्टेट्स के लिए 99.99% लॉजिकल फिडेलिटी हासिल की। इससे संसाधनों की एक बाधा दूर हुई, न कि व्यावसायिक उपयोग के लिए तैयार क्वांटम कंप्यूटर का प्रदर्शन हुआ।

मुख्य बातें

  • त्रुटियों में यह कमी तैयार किए गए क्वांटम स्टेट्स पर लागू होती है, पूरे कंप्यूटर की सटीकता पर नहीं।
  • यह तकनीक उपयोगी क्वांटम गणनाओं के लिए आवश्यक हार्डवेयर संसाधन घटा सकती है।
  • Google का कहना है कि बड़े पैमाने पर प्रदर्शन और आगे इंजीनियरिंग कार्य अभी भी जरूरी हैं।

विषय-सूची

मैजिक स्टेट कल्टिवेशन ने क्या हासिल किया

Google Quantum AI के शोधकर्ताओं ने उच्च-गुणवत्ता वाले T-states तैयार करने की एक विधि प्रदर्शित की। T-states एक प्रकार के क्वांटम स्टेट हैं, जो यूनिवर्सल क्वांटम कंप्यूटिंग के लिए जरूरी ऑपरेशन्स को सक्षम बनाते हैं। 99.99% लॉजिकल फिडेलिटी का यह परिणाम मापता है कि ये स्टेट अपने निर्धारित स्वरूप से कितने मेल खाते हैं।

Google की Willow कल्टिवेशन घोषणा में कल्टिवेशन के बिना तैयार किए गए स्टेट्स की तुलना में त्रुटियों में लगभग 40 गुना कमी का उल्लेख है। कंपनी ने कहा कि यह शोध 15 अक्टूबर को Science में प्रकाशित हुआ।

इसका दायरा महत्वपूर्ण है: यह प्रयोग क्वांटम गणना के एक बुनियादी घटक को बेहतर बनाता है। इससे यह साबित नहीं होता कि पूरे प्रोग्राम 99.99% सटीकता के साथ चल सकते हैं या प्रोसेसर व्यावसायिक अनुप्रयोगों के लिए तैयार है।

विषयविवरण
सैद्धांतिक विधिCraig Gidney, Noah Shutty और Cody Jones ने 2024 में विकसित की।
प्रारंभिक त्रुटि-सुधार कोडडिस्टेंस-3 कलर कोड।
लक्ष्य त्रुटि-सुधार कोडडिस्टेंस-5 सरफेस कोड।

स्टेट तैयार करने में इतने संसाधन क्यों लगते हैं

उच्च-गुणवत्ता वाले, त्रुटि-सुधारित मैजिक स्टेट तैयार करने में बहुत संसाधन लगते हैं, और प्रत्येक स्टेट का उपयोग हो जाने के बाद उसे दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। Google ने अनुमान का हवाला देते हुए कहा कि इन्हें तैयार करने में क्वांटम कंप्यूटर की क्षमता का 95% तक हिस्सा लग सकता है, जिससे गणनाओं के लिए अपेक्षाकृत कम क्षमता बचती है।

कल्टिवेशन एक फिल्टर की तरह काम करता है: शोधकर्ता चिप के एक छोटे हिस्से में शोरयुक्त स्टेट डालते हैं, फिर समन्वित मापों से त्रुटियों का पता लगाकर त्रुटिपूर्ण प्रयासों को खारिज करते हैं। बचा हुआ स्टेट बड़े एन्कोडिंग के अनुरूप ढाला जा सकता है।

इसलिए, अधिक कुशल तैयारी व्यावहारिक कार्यों के लिए आवश्यक क्वांटम कंप्यूटर का आकार घटा सकती है। यह अभी संभावित लाभ है, किसी व्यावसायिक प्रणाली की लागत में प्रदर्शित कमी नहीं।

हार्डवेयर अनुकूलता बेहतर हुई, लेकिन पैमाने पर क्षमता अब भी साबित नहीं

टीम ने कल्टिवेट किए गए स्टेट्स को दो त्रुटि-सुधार तरीकों के बीच भी स्थानांतरित किया—कलर कोड से सरफेस कोड में। इससे यह जांचा गया कि क्या शुद्ध किए गए स्टेट्स Google के कंप्यूटिंग आर्किटेक्चर के भीतर इस बदलाव के दौरान कायम रह सकते हैं।

पहले के एक बेंचमार्क में प्रयोगशाला के शोर से बाधा आने के बाद, प्रयोग के लिए कंट्रोल सिस्टम और मापन तकनीकों—दोनों में बदलाव करने पड़े। Google ने कहा कि व्यावहारिक क्वांटम कंप्यूटिंग के अनुकूल पैमाने पर कल्टिवेशन को संचालित करने से पहले बड़ी तकनीकी चुनौतियां बनी हुई हैं।

निष्कर्ष

यह परिणाम कल्टिवेशन को सिद्धांत से हार्डवेयर प्रदर्शन तक ले जाता है। अगला तकनीकी पड़ाव यह दिखाना है कि अपने लाभ बरकरार रखते हुए इस विधि को बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है; Google ने व्यावहारिक उपयोग की कोई समय-सीमा नहीं दी।

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