30 सितंबर, 2026 को समाप्त तिमाही में HPCL का समेकित शुद्ध मुनाफा लगभग ₹3,625 करोड़ रहा, जो एक साल पहले की तुलना में 6% कम है। ईंधन बिक्री में हुए घाटे ने रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार से मिले लाभ को घटाया। सरकारी कंपनी Hindustan Petroleum Corporation ने 22 अक्टूबर को नतीजे घोषित किए। इससे पिछली तिमाही में लगभग ₹12,265 करोड़ का घाटा दर्ज करने के बाद कंपनी फिर से मुनाफे में लौटी।

मुख्य बातें

  • दूसरी तिमाही में मुनाफा पिछली तिमाही के मुकाबले सुधरा, लेकिन एक साल पहले के स्तर से कम रहा।
  • पहली छमाही में रिफाइनिंग मार्जिन में तेज सुधार हुआ, जबकि बाजार से कम दरों पर ईंधन बिक्री ने मुनाफे पर दबाव डाला।
  • तिमाही में बिक्री की मात्रा 5.5% बढ़ी और रिफाइनरियां पूरी क्षमता पर संचालित हुईं।

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HPCL की कमाई रिफाइनिंग और विपणन के बीच अंतर दर्शाती है

अप्रैल–सितंबर 2026, यानी वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही में HPCL का औसत सकल रिफाइनिंग मार्जिन $27.89 प्रति बैरल रहा, जबकि एक साल पहले यह $5.95 था। ये आधे वर्ष के आंकड़े हैं, केवल दूसरी तिमाही के मार्जिन नहीं।

कंपनी ने कहा कि इन मार्जिनों की गणना चुनिंदा पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात पर विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और सड़क एवं बुनियादी ढांचा उपकर के प्रभाव से पहले की गई थी। इसलिए इन्हें संसाधित किए गए प्रत्येक बैरल से हुई अंतिम आय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

HPCL ने कहा कि पश्चिम एशिया संघर्ष के बीच कुछ पेट्रोलियम उत्पादों पर विपणन मार्जिन दबाए जाने से पहली छमाही के मुनाफे को नुकसान पहुंचा। सरकारी तेल विपणन कंपनियां उपभोक्ताओं को अस्थिर कीमतों से बचाने के लिए पेट्रोल, डीजल और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) बाजार दरों से कम पर बेच रही थीं।

मदविवरण
Q2 FY27 की समेकित कुल आयलगभग ₹1.40 लाख करोड़, जबकि Q1 FY27 में ₹1.46 लाख करोड़ और Q2 FY26 में ₹1.11 लाख करोड़ थी।
Q2 FY27 के समेकित कुल खर्चलगभग ₹1.33 लाख करोड़, जबकि Q1 FY27 में ₹1.64 लाख करोड़ और Q2 FY26 में ₹1.06 लाख करोड़ थे।
पहली छमाही में विदेशी मुद्रा का नुकसानअप्रैल–सितंबर 2026 में ₹313.80 करोड़, जबकि एक साल पहले ₹798.18 करोड़ था।
पहली छमाही का पूंजीगत व्ययअप्रैल–सितंबर 2026 में ₹3,819 करोड़।

LPG की गैर-मान्यता प्राप्त कमी ₹18,049 करोड़ तक पहुंची

HPCL ने 30 सितंबर, 2026 तक बाजार से कम दरों पर LPG सिलिंडर बेचने से जुड़ा ₹18,048.82 करोड़ का संचयी नकारात्मक बफर बताया, जिसे गैर-मान्यता प्राप्त के रूप में वर्णित किया गया। 31 मार्च, 2026 को यह ₹12,798.67 करोड़ और एक साल पहले ₹14,240.64 करोड़ था।

पहली छमाही में यह राशि लगभग ₹5,250 करोड़ बढ़ी। यह संचयी गैर-मान्यता प्राप्त राशि है, अलग से रिपोर्ट किया गया दूसरी तिमाही का खर्च नहीं। इसे तिमाही के शुद्ध मुनाफे के आंकड़े के समान नहीं मानना चाहिए।

यह जोखिम कंपनी के बड़े उपभोक्ता-केंद्रित कारोबार का हिस्सा है। 30 जून, 2026 तक HPCL के रिटेल और LPG वितरण नेटवर्क में 25,238 रिटेल आउटलेट और 6,391 LPG वितरक शामिल थे, जो इसके ईंधन-विपणन कारोबार के पैमाने को दर्शाता है।

रिफाइनरियों का पूर्ण उपयोग बिक्री बढ़ाने में सहायक

HPCL ने Q2 FY27 में 6.20 मिलियन टन कच्चे तेल का प्रसंस्करण किया और 100% क्षमता पर परिचालन किया। निर्यात सहित बिक्री सालाना आधार पर 5.5% बढ़कर 12.73 मिलियन टन हो गई।

तिमाही का पूंजीगत व्यय ₹2,085 करोड़ रहा, जिसका उपयोग रिफाइनिंग और विपणन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने तथा परिचालन दक्षता बढ़ाने पर किया गया। अलग से, कंपनी के EBITDA सुधार कार्यक्रम Project Samridhi 2.0 से पहली छमाही में ₹327 करोड़ का संचय हुआ, जो लगभग $0.18 प्रति बैरल के बराबर है।

परिचालन के आंकड़े दिखाते हैं कि अधिक उत्पादन और बिक्री से ही मुनाफा तय नहीं हुआ: रिफाइनिंग अर्थशास्त्र में सुधार की भरपाई ईंधन-विपणन मार्जिन पर दबाव ने आंशिक रूप से की।

निष्कर्ष

HPCL तिमाही मुनाफे में लौट आई, लेकिन रिफाइनिंग मार्जिन में सुधार से बाजार से कम दरों पर ईंधन बिक्री का दबाव खत्म नहीं हुआ। अगली रिपोर्टिंग अवधि से पता चलेगा कि यह सुधार कायम रहता है या नहीं और LPG की संचयी कमी बढ़ती रहती है या नहीं।

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