23 अक्टूबर, 2026 को चांदी की कीमतें 11 महीने के निचले स्तर पर आ गईं। मुंबई में हाजिर चांदी ₹195,000 प्रति किलोग्राम पर कारोबार कर रही थी और भारतीय वायदा भाव 3.4% गिर गए। इस गिरावट के बाद चांदी जनवरी के रिकॉर्ड स्तर से 53% से अधिक नीचे आ गई। तेल की ऊंची कीमतों से महंगाई की चिंताएं तेज हुईं और ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों ने कीमती धातुओं पर दबाव डाला।
मुख्य बातें
- शुक्रवार को MCX चांदी वायदा ₹6,799 गिरकर ₹192,800 प्रति किलोग्राम पर आ गया।
- पिछले 10 कारोबारी सत्रों में चांदी वायदा 14% से अधिक गिरा।
- सोना भी कमजोर हुआ, जबकि औद्योगिक मांग को लेकर चिंताओं ने चांदी पर दबाव और बढ़ाया।
विषय-सूची
- जनवरी के बाद चांदी की कीमतों में तेज गिरावट जारी
- तेल और ब्याज दरों की उम्मीदों से बुलियन पर दबाव
- औद्योगिक मांग चांदी के लिए अलग चिंता
- निष्कर्ष
जनवरी के बाद चांदी की कीमतों में तेज गिरावट जारी
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज में ताजा गिरावट के साथ 10 सत्रों में चांदी का कुल नुकसान ₹32,955 प्रति किलोग्राम हो गया। मुंबई में हाजिर चांदी भी ₹200,000 से नीचे फिसल गई, जिससे स्पष्ट हुआ कि कमजोरी केवल वायदा बाजार तक सीमित नहीं थी।
इस गिरावट से 29 जनवरी के बाद कीमतों में तेज उलटफेर हुआ है, जब चांदी ₹420,048 प्रति किलोग्राम तक पहुंची थी। हाजिर और वायदा भाव अलग-अलग बाजारों के हैं और इन्हें एक-दूसरे के समान कीमतें नहीं मानना चाहिए।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| मुंबई हाजिर चांदी, 22 अक्टूबर | ₹200,000 प्रति किलोग्राम |
| मुंबई हाजिर चांदी, 23 अक्टूबर | ₹195,000 प्रति किलोग्राम |
| MCX सोना वायदा, जनवरी का शिखर | ₹181,000 प्रति 10 ग्राम |
| MCX सोना वायदा, 23 अक्टूबर | ₹142,000 प्रति 10 ग्राम से नीचे; जनवरी के शिखर से 20% से अधिक नीचे |
तेल और ब्याज दरों की उम्मीदों से बुलियन पर दबाव
InvestValue के मुख्य निवेश अधिकारी आदित्य अग्रवाल ने बिकवाली के एक प्रमुख कारण के रूप में तेल का उल्लेख किया। उन्होंने खाड़ी क्षेत्र में आपूर्ति से जुड़े नए जोखिमों के बीच ब्रेंट क्रूड के 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहने की बात कही और कहा कि बाजार साल के अंत से पहले अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे थे। यह उम्मीद किसी पुष्ट नीतिगत फैसले के बराबर नहीं है।
ऊंची ब्याज दरें आय देने वाली परिसंपत्तियों को सोने की तुलना में अधिक आकर्षक बना सकती हैं, क्योंकि सोना ब्याज नहीं देता। अप्रैल 2021 में प्रकाशित वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के सोने और ब्याज दरों पर विश्लेषण में ऊंची दरों को अल्पावधि में संभावित दबाव बताया गया है, लेकिन यह भी आगाह किया गया है कि बढ़ती दरें हमेशा सोने के कमजोर प्रदर्शन का कारण नहीं बनतीं। यह ऐतिहासिक विश्लेषण संदर्भ देता है, अक्टूबर 2026 की कारोबारी स्थितियों की पुष्टि नहीं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना लगभग 4,015 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था, जो 20 जुलाई के बाद का सबसे निचला स्तर था। गुरुवार को इसमें 2.8% की गिरावट आई थी। भारतीय सोना वायदा भी ₹142,000 प्रति 10 ग्राम से नीचे गिर गया।
औद्योगिक मांग चांदी के लिए अलग चिंता
प्रौद्योगिकी क्षेत्र में बिकवाली के दौरान चीन के सौर-पैनल विनिर्माण और चिप बनाने वाले उद्योग से मांग को लेकर अतिरिक्त चिंताएं उभरीं। इन चिंताओं से ब्याज दरों के दबाव के अलावा औद्योगिक मांग का एक अलग पहलू जुड़ गया, जिसका असर कीमती धातुओं पर पड़ रहा है।
उपलब्ध आंकड़े औद्योगिक चांदी की खपत में किसी कमी की मात्रा नहीं बताते और न ही यह स्थापित करते हैं कि कीमतों में गिरावट का कितना हिस्सा प्रत्येक कारक के कारण था।
निष्कर्ष
चांदी की गिरावट में कीमती धातुओं पर व्यापक दबाव के साथ औद्योगिक मांग को लेकर चिंताएं भी शामिल थीं। फेडरल रिजर्व का अगला नीतिगत फैसला अग्रवाल द्वारा बताई गई ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों की परीक्षा होगा; ये उम्मीदें घोषित दर-वृद्धि से अलग हैं।
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अस्वीकरण
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