कच्चे तेल की कीमतों में ताजा उछाल से महंगाई की चिंताएं फिर बढ़ने के कारण 22 अक्टूबर, 2026 को भारतीय शेयर लगातार तीसरे सत्र में गिरे। सेंसेक्स 460.30 अंक, यानी 0.62%, गिरकर 73,249.39 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 123.70 अंक, यानी 0.54%, घटकर 22,687.65 पर आ गया। रुपया भी कमजोर हुआ और उसकी आठ सत्रों से जारी बढ़त का सिलसिला थम गया।
मुख्य बातें
- पश्चिम एशिया में तनाव फिर बढ़ने के बीच ब्रेंट कच्चा तेल करीब 3% चढ़कर लगभग $112–$113 प्रति बैरल पर पहुंच गया।
- मार्जिन के सहारे लिए गए शेयर पोज़िशन घटते रहने से स्मॉल-कैप और मिड-कैप शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा।
- शुक्रवार को निर्धारित कंपनियों के नतीजे, आय और मांग की उम्मीदों की अगली परीक्षा होंगे।
विषय-सूची
- इंट्राडे सुधार के बावजूद भारतीय शेयरों में गिरावट
- तेल में उछाल से रुपये पर दबाव बढ़ा
- विदेशी बिकवाली जारी रहने के बीच लीवरेज वाले पोज़िशन घटे
- आय के नतीजे अगली निर्धारित कसौटी
- निष्कर्ष
इंट्राडे सुधार के बावजूद भारतीय शेयरों में गिरावट
निफ्टी सत्र के निचले स्तर से उबरकर 22,785 तक पहुंचा, लेकिन ऊंचे स्तरों पर विक्रेता फिर सक्रिय हो गए। निचले स्तर पर बंद होने से जाहिर हुआ कि यह सुधार दिनभर के बिकवाली दबाव को पलट नहीं पाया।
बजाज फाइनेंस, सिप्ला और अल्ट्राटेक सीमेंट निफ्टी के प्रमुख बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे। नेस्ले इंडिया, इटरनल और एचडीएफसी लाइफ में सबसे ज्यादा गिरावट आई। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा उत्पादों के कथित भ्रामक दावों को लेकर नोटिस जारी किए जाने के बाद नेस्ले इंडिया 2% से अधिक गिरा।
फार्मास्यूटिकल्स, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में मामूली बढ़त दर्ज हुई, जबकि मीडिया, उपभोक्ता स्टेपल्स और सूचना प्रौद्योगिकी में सबसे ज्यादा गिरावट आई। छोटी कंपनियों के सूचकांकों में प्रमुख बेंचमार्क की तुलना में अधिक गिरावट रही।
| मद | विवरण |
|---|---|
| सेंसेक्स का इंट्राडे निचला स्तर | 22 अक्टूबर को 73,005.11 |
| निफ्टी 50 का इंट्राडे निचला स्तर | 22 अक्टूबर को 22,554.85 |
| निफ्टी मिडकैप 100 | सत्र में 0.87% गिरा |
| निफ्टी स्मॉलकैप 100 | 1.14% गिरा; 12 जून के बाद के सबसे निचले स्तर पर |
| एनएसई 500 | सितंबर के शिखर से लगभग 9% नीचे |
तेल में उछाल से रुपये पर दबाव बढ़ा
ब्रेंट की कीमत में बढ़ोतरी की वजह सऊदी अरामको के एक तेल क्षेत्र पर हूती हमले की खबर थी, जबकि अमेरिकी बेंचमार्क डब्ल्यूटीआई करीब $100 प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था। इक्विरस वेल्थ के प्रबंध निदेशक अंकुर पुंज ने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से घरेलू शेयरों में बिकवाली का दबाव फिर बढ़ा और महंगाई को लेकर चिंताएं बढ़ीं।
आईसीई की ब्रेंट कच्चे तेल के वायदा अनुबंध की विशिष्टताओं के अनुसार, यह 1,000 बैरल का अनुबंध है, जिसका भाव अमेरिकी डॉलर और सेंट प्रति बैरल में दिया जाता है। ये विशिष्टताएं कारोबार की इकाई बताती हैं, न कि 22 अक्टूबर का बाजार भाव।
रुपया करीब 36 पैसे गिरकर 94.82 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। एलकेपी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक जतिन त्रिवेदी ने कहा कि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से भारत के आयात बिल को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं। प्रति डॉलर 94.45–95.25 की उनकी निकट-अवधि की सीमा पूर्वानुमान थी, वास्तविक कारोबार की दर्ज सीमा नहीं।
भारतीय रिजर्व बैंक की अक्टूबर की नीतिगत बैठक का विवरण 21 अक्टूबर को जारी हुआ। इसमें महंगाई के दबाव के व्यापक होने की बात कही गई और रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 5.50% करने का उल्लेख था।
विदेशी बिकवाली जारी रहने के बीच लीवरेज वाले पोज़िशन घटे
मार्जिन के सहारे लिए गए शेयर पोज़िशन सितंबर के रिकॉर्ड ₹1.6 ट्रिलियन से घटकर ₹1.56 ट्रिलियन पर आ गए। इससे मार्च के बाद पहली मासिक गिरावट की संभावना बनी। स्मॉल-कैप और मिड-कैप शेयरों का लीवरेज बुक में 46% हिस्सा था।
उधार के पैसे से लिए गए पोज़िशन में कमी के साथ छोटी कंपनियों में कमजोरी जारी रही, हालांकि इससे यह साबित नहीं होता कि बाजार की कितनी गिरावट जबरन बिकवाली के कारण हुई। वैश्विक फंडों ने 2026 में भारतीय शेयरों से $32 बिलियन से अधिक निकाले थे—यह एक रिकॉर्ड था।
आय के नतीजे अगली निर्धारित कसौटी
इन्फोसिस, अडानी पावर, जेएसडब्ल्यू स्टील, टाटा मोटर्स और सीजी पावर के नतीजे शुक्रवार, 23 अक्टूबर को आने वाले थे। उम्मीद थी कि इन घोषणाओं से तेल और विदेशी निवेशकों की निकासी के दबाव के साथ-साथ ध्यान कंपनी-विशिष्ट प्रदर्शन पर भी जाएगा।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि बाजार की दिशा दूसरी तिमाही के नतीजों और मांग पर प्रबंधन की टिप्पणियों पर निर्भर करेगी। फेडरल रिजर्व, यूरोपीय केंद्रीय बैंक और बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसले भी अगले सप्ताह आने वाले थे।
निष्कर्ष
22 अक्टूबर को भारतीय शेयर दोनों प्रमुख बेंचमार्क में गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि छोटी कंपनियों में कमजोरी अधिक रही। तेल की ऊंची कीमतों की पृष्ठभूमि में कॉरपोरेट प्रदर्शन का आकलन करने का अगला निर्धारित अवसर 23 अक्टूबर को आने वाले कंपनियों के नतीजे थे।
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