वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 23 अक्टूबर 2026 को हुई FSDC बैठक में भारत की वित्तीय स्थिरता और विकास परिषद ने वित्तीय जोखिमों पर सतर्कता बरतने और नियामकों के बीच अधिक समन्वय का आह्वान किया। परिषद ने भू-राजनीतिक अनिश्चितता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उछाल और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेज वृद्धि की समीक्षा की। साथ ही, निवेश सुधारों और साइबर सुरक्षा के मजबूत उपायों पर चर्चा की।

मुख्य बातें

  • भू-राजनीतिक और वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताएं बढ़ने के बीच सीतारमण ने परिषद की बैठकें अधिक बार आयोजित करने का आग्रह किया।
  • परिषद ने वित्तीय क्षेत्र की साइबर सुरक्षा रणनीति की समीक्षा की, जिसमें क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की तैयारियां भी शामिल थीं।
  • निवेश प्रवाह, ग्राहक जांच को सरल बनाने और परिसंपत्तियों के टोकनीकरण पर चर्चा हुई; इन्हें लागू किए जा चुके सुधारों के रूप में घोषित नहीं किया गया।

विषय-सूची

FSDC बैठक में समन्वय और जोखिम निगरानी को प्राथमिकता

वित्त मंत्रालय ने कहा कि परिषद ने वित्तीय स्थिरता के लिए संभावित खतरों को कम करने और वित्तीय प्रणाली की लचीलापन क्षमता मजबूत करने हेतु सक्रिय प्रयासों की आवश्यकता को स्वीकार किया। सदस्यों ने वित्तीय क्षेत्र के विकास को समर्थन देते हुए नियामकों के बीच समन्वय मजबूत करने पर सहमति जताई।

परिषद का वित्तीय स्थिरता और समन्वय का दायित्व ऐसे जोखिमों तक फैला है जो अलग-अलग नियामकों के कार्यक्षेत्रों के पार जा सकते हैं। भारतीय आर्थिक सेवा के अनुसार, इसकी भूमिका में मैक्रोप्रूडेंशियल निगरानी करना और नियामकों की स्वायत्तता को प्रभावित किए बिना उनके बीच समन्वय संबंधी मुद्दों का समाधान करना शामिल है।

बढ़ती भू-राजनीतिक चुनौतियों और वैश्विक अनिश्चितता के मद्देनजर सीतारमण ने FSDC की बैठकें अधिक बार आयोजित करने का भी आह्वान किया। बैठक में शामिल लोगों में भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड के अध्यक्ष तुहिन पांडे और बीमा नियामक अजय सेठ शामिल थे।

मदविवरण
निवेश संसाधनGIFT-IFSC सहित निवेश के लिए संसाधनों का प्रवाह बेहतर करना।
ग्राहक सत्यापनअपने ग्राहक को जानें (KYC) प्रक्रियाओं को सरल और डिजिटल बनाना।
अनिवासी भारतीयडिजिटल ऑनबोर्डिंग पर चर्चा।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकडिजिटल ऑनबोर्डिंग पर चर्चा।

साइबर सुरक्षा समीक्षा में महत्वपूर्ण प्रणालियां और ग्रामीण बैंक शामिल

परिषद ने भारत के वित्तीय क्षेत्र की साइबर लचीलापन क्षमता की समीक्षा की और वित्तीय क्षेत्र की साइबर सुरक्षा रणनीति पर ध्यान दिया। यह रणनीति वित्तीय नियामकों और साइबर सुरक्षा एजेंसियों वाले एक अंतर-मंत्रालयी समूह ने तैयार की है।

वित्त मंत्रालय ने कहा कि रणनीति के कार्यान्वयन से क्षेत्र की समग्र लचीलापन क्षमता मजबूत होने की उम्मीद है। चर्चाओं में महत्वपूर्ण सूचना अवसंरचना की सुरक्षा, सुरक्षा प्रणालियों की लचीलापन क्षमता और क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की साइबर सुरक्षा तैयारियां शामिल थीं।

इन चर्चाओं का संबंध तैयारियों और सुरक्षा उपायों से था; इनमें यह घोषणा नहीं की गई कि रणनीति का कार्यान्वयन पूरा हो चुका है।

निवेश और डिजिटल-वित्त सुधार एजेंडे में बने हुए हैं

जोखिम निगरानी के साथ-साथ परिषद ने घरेलू निवेश परिवेश को मजबूत करने, पूंजी प्रवाह बढ़ाने और वित्तीय क्षेत्र के सुधारों को गहरा करने पर चर्चा की। परिषद ने पिछले निर्णयों और बजट घोषणाओं को लागू करने की रणनीति पर भी विचार किया।

डिजिटल आधुनिकीकरण के संदर्भ में फिनटेक नवाचार और वित्तीय परिसंपत्तियों तथा अन्य वास्तविक परिसंपत्तियों के टोकनीकरण की संभावनाओं पर चर्चा हुई। मंत्रालय के विवरण में इन्हें पड़ताल के क्षेत्र बताया गया, न कि कोई नया टोकनीकरण ढांचा या स्वीकृत कार्यान्वयन।

निवेश और ऑनबोर्डिंग एजेंडे में निम्नलिखित क्षेत्र शामिल थे:

निष्कर्ष

अगला जोर साइबर सुरक्षा रणनीति को लागू करने और पिछले निर्णयों तथा बजट घोषणाओं पर आगे की कार्रवाई करने पर होगा। 23 अक्टूबर की चर्चाओं में इस काम की प्राथमिकताएं तय की गईं; इनमें पूरे हो चुके सुधार स्थापित नहीं किए गए और न ही बैठकों का नया कार्यक्रम तय किया गया।

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