23 अक्टूबर 2026 को समाप्त सप्ताह में भारतीय स्मॉल-कैप 7.10% गिरे, जबकि मिड-कैप में 5.26% की गिरावट आई। यह गिरावट देश के ब्लू-चिप बेंचमार्क से कहीं अधिक थी। निफ्टी स्मॉलकैप 250 में फरवरी 2025 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट दर्ज हुई, जबकि निफ्टी मिडकैप 150 में अक्टूबर 2024 के बाद सबसे बड़ी गिरावट आई।

मुख्य बातें

  • शुक्रवार को स्मॉल-कैप और मिड-कैप सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी 50 की तुलना में कहीं अधिक तेजी से गिरे।
  • सप्ताह के दौरान बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार मूल्य में ₹20.78 लाख करोड़ की कमी आई।
  • विदेशी निवेशकों ने शुक्रवार को शेयर खरीदे, लेकिन अक्टूबर में वे अब भी बड़े शुद्ध विक्रेता बने रहे।

विषय-सूची

भारतीय स्मॉल-कैप में व्यापक बाजार की गिरावट सबसे तेज

शुक्रवार, 23 अक्टूबर को निफ्टी स्मॉलकैप 250 में 2.8% और निफ्टी मिडकैप 150 में 2.1% की गिरावट आई। सेंसेक्स और निफ्टी 50 ने क्रमशः 0.17% और 0.39% की गिरावट के साथ बंद होकर नुकसान सीमित रखा। सत्र के दौरान पहले दोनों सूचकांक 1% से अधिक गिर चुके थे।

दैनिक चालों में यह अंतर दिखाता है कि बिकवाली का सबसे अधिक असर छोटी कंपनियों पर पड़ा। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण शुक्रवार को 1.42%, यानी ₹6.54 लाख करोड़ घटकर ₹453.45 लाख करोड़ रह गया। सप्ताह के दौरान इसमें 4.38%, यानी ₹20.78 लाख करोड़ की कमी आई।

सप्ताह की भारी गिरावट के बावजूद, पूरे वर्ष के हिसाब से छोटी कंपनियों के सूचकांकों में कमजोरी कम रही। 2026 में मिडकैप 150 में 7% और स्मॉलकैप 250 में 1.8% की गिरावट आई, जबकि सेंसेक्स 14.2% और निफ्टी 50 13.2% नीचे रहे।

मदविवरण
सेंसेक्स का बंद स्तर23 अक्टूबर को 73,123.83; 125.56 अंक नीचे।
निफ्टी 50 का बंद स्तर23 अक्टूबर को 22,600; 87.65 अंक नीचे।
मिडकैप की साप्ताहिक तुलनाअक्टूबर 2024 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट।
स्मॉल-कैप की साप्ताहिक तुलनाफरवरी 2025 के बाद सबसे बड़ी साप्ताहिक गिरावट।

शुक्रवार की विदेशी खरीदारी से अक्टूबर की निकासी पर फर्क नहीं

विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने शुक्रवार को शुद्ध रूप से ₹887.65 करोड़ के शेयर खरीदे। उस दिन की खरीदारी से महीने का व्यापक रुझान नहीं बदला: अक्टूबर में शुद्ध बिक्री ₹51,466 करोड़ रही, जबकि सितंबर में यह ₹44,012 करोड़ थी।

घरेलू संस्थागत निवेशकों ने शुक्रवार को शुद्ध रूप से ₹3,235 करोड़ के शेयर खरीदे। इससे अक्टूबर में उनकी शुद्ध खरीद ₹59,110 करोड़ हो गई।

कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट के प्रबंध निदेशक निलेश शाह ने विदेशी निवेशकों और शुरुआती सार्वजनिक निर्गमों से शेयरों की आपूर्ति का उल्लेख किया। उन्होंने नकारात्मक कैलेंडर-वर्ष प्रतिफल और कर रियायतों की उम्मीदें पूरी न होने से जुड़ी कमजोर धारणा की ओर भी इशारा किया।

फंड मैनेजर मूल्यांकन परख रहे हैं, अस्थिरता बढ़ी

शुक्रवार को इंडिया VIX में 6% की बढ़ोतरी हुई। इंडिया VIX के बारे में NSE की व्याख्या के अनुसार, यह निफ्टी ऑप्शंस की कीमतों से निकाला गया माप है, जो अगले 30 कैलेंडर दिनों की अपेक्षित अस्थिरता को दर्शाता है। यह उतार-चढ़ाव के अपेक्षित स्तर को मापता है, बाजार की दिशा का पूर्वानुमान नहीं लगाता।

एडलवाइस एसेट मैनेजमेंट के इक्विटी फंड मैनेजर ध्रुव भाटिया ने इस गिरावट को आय में गिरावट के बजाय अत्यधिक ऊंचे मूल्यांकन से जुड़ा व्यापक जोखिम-विमुखता का रुझान बताया। उन्होंने कहा कि धारणा कमजोर होने और नकदी की उपलब्धता घटने के साथ, कमजोर आय-प्रोफाइल वाले शेयरों पर सबसे अधिक असर पड़ा।

शाह ने कहा कि सितंबर तिमाही के नतीजे उम्मीदों के अनुरूप रहे या उनसे बेहतर थे, लेकिन उन्होंने तेल की ऊंची कीमतों, राजकोषीय घाटे और रुपये की अस्थिरता को अनिश्चितता के स्रोत बताया। ब्रेंट कच्चा तेल $114.31 प्रति बैरल पर था, जो सप्ताह के दौरान लगभग 6% ऊपर था।

निष्कर्ष

सप्ताह की गिरावट से छोटी कंपनियों और पहले से कमजोर ब्लू-चिप शेयरों के प्रदर्शन के बीच का अंतर घटा। कंपनी के नतीजे और घरेलू खरीदारी बाजार को सहारा दे सकते हैं या नहीं, यह परखने के लिए सितंबर तिमाही के नतीजे और अक्टूबर में संस्थागत निवेशकों के शेष प्रवाह अगले अहम पड़ाव हैं।

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