25 अक्टूबर, 2026 तक भारत-अमेरिका व्यापार समझौता अटका हुआ था। वार्ता पर नज़र रखने वाले सूत्रों ने अमेरिका के टैरिफ और भारत की कृषि रियायतों को लेकर मतभेदों का ज़िक्र किया। यह गतिरोध अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के आकलन से उलट है, जिनका कहना था कि अंतरिम समझौता 99% पूरा हो चुका है और कुछ ही हफ्तों में इसकी घोषणा हो सकती है।

मुख्य बातें

  • भारत 10% के अतिरिक्त शुल्क से अधिक टैरिफ का विरोध कर रहा है, जिसका सामना फिलहाल उसके निर्यात को करना पड़ रहा है, ऐसा वार्ता से जुड़े सूत्रों का कहना है।
  • फरवरी के ढांचे में भारतीय वस्तुओं पर 18% अमेरिकी जवाबी टैरिफ की परिकल्पना की गई थी।
  • कृषि रियायतें और भविष्य में टैरिफ दंड लगाए जाने को लेकर अनिश्चितता समझौते की राह में बाधाएं बनी हुई हैं।

विषय-सूची

टैरिफ में अंतर से भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर अड़चन

वॉशिंगटन फरवरी में प्रस्तावित 18% की दर बरकरार रखना चाहता है, जबकि वार्ता से परिचित सूत्रों के अनुसार नई दिल्ली को मौजूदा 10% अतिरिक्त शुल्क से अधिक दर स्वीकार करने का कोई खास आर्थिक औचित्य नहीं दिखता। इन सूत्रों ने कहा कि 12% या 14% की समझौता दर भी भारत को मंजूर नहीं होगी।

6 फरवरी के संयुक्त व्यापार ढांचे में भारत में उत्पादित वस्तुओं पर 18% अमेरिकी जवाबी टैरिफ तय किया गया था। साथ ही, अंतरिम समझौता सफलतापूर्वक संपन्न होने पर चुनिंदा उत्पादों को छूट देने की संभावना भी रखी गई थी। यह दस्तावेज़ पहले की वार्ता की शर्तें तय करता है, न कि अक्टूबर में लागू टैरिफ व्यवस्था।

इसलिए मुख्य मतभेद केवल इस बात को लेकर नहीं है कि वॉशिंगटन फरवरी के प्रस्ताव में कितनी कटौती करेगा। भारत किसी भी समझौते को उस कम अतिरिक्त शुल्क के मुकाबले परख रहा है, जिसका सामना निर्यातकों को फिलहाल करना पड़ रहा है, ऐसा वार्ता से जुड़े सूत्रों का कहना है।

विषयविवरण
फरवरी के ढांचे में कृषि उत्पादइसमें पशु-आहार उत्पाद, मेवे, फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट शामिल थे।
अमेरिकी जवाबी टैरिफ से संभावित छूटइसमें जेनेरिक दवाएं, रत्न और हीरे तथा विमान के पुर्जे शामिल थे; यह छूट अंतरिम समझौते के सफलतापूर्वक संपन्न होने पर निर्भर थी।
सहमत टैरिफ में बदलावढांचे के तहत, यदि कोई एक देश सहमत टैरिफ में बदलाव करता है तो दूसरा देश भी अपनी प्रतिबद्धताओं में संशोधन कर सकता था।

कृषि रियायतों से राजनीतिक गणना जटिल

सूत्रों ने कहा कि नई दिल्ली इस बात पर भी विचार कर रही है कि भारतीय निर्यात पर अधिक टैरिफ का बोझ स्वीकार करते हुए अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए अपना बाजार खोलने की घरेलू राजनीतिक लागत क्या होगी।

फरवरी के ढांचे में अमेरिका के खाद्य और कृषि उत्पादों की व्यापक श्रेणी पर भारतीय टैरिफ घटाने या समाप्त करने का प्रस्ताव था। वार्ता पर नज़र रखने वाले सूत्रों ने कहा कि भारत उन रियायतों को लेकर सतर्क है, जिन्हें ट्रंप प्रशासन अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले रिपब्लिकन-समर्थक राज्यों के मतदाताओं के सामने उपलब्धि के तौर पर पेश कर सकता है।

सूत्रों ने बताया कि भारत चुनावों के बाद आगे का रास्ता तय करने की ओर झुका हुआ है। यह नई दिल्ली की वार्ता संबंधी स्थिति का विवरण है, समझौते पर हस्ताक्षर करने की घोषित समय-सीमा नहीं।

भारत आगे के टैरिफ दंड से सुरक्षा चाहता है

भारत संभावित अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ को लेकर आश्वासन भी चाहता है। इनमें रूस पर प्रतिबंधों से जुड़े कानून या अतिरिक्त उत्पादन क्षमता की जांच से संबंधित उपाय शामिल हैं। सूत्रों ने कहा कि नई दिल्ली चाहती है कि इसके परिणामस्वरूप उस पर लगने वाला टैरिफ बोझ वियतनाम, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे प्रतिस्पर्धियों से कम रहे।

भारत यह आश्वासन भी मांग रहा है कि समझौते के बाद नए टैरिफ नहीं लगाए जाएंगे। सूत्रों के अनुसार, वॉशिंगटन ने अब तक संतोषजनक जवाब नहीं दिया है, जिससे किसी भी टैरिफ समझौते का दायरा और टिकाऊपन अनिश्चित बना हुआ है।

निष्कर्ष

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के लिए टैरिफ दर और बाद में लगाए जा सकने वाले दंड से सुरक्षा—दोनों पर सहमति जरूरी है। रुबियो द्वारा बताई गई घोषणा की समय-सीमा अब भी एक उम्मीद है, सहमति से तय हस्ताक्षर की तारीख नहीं।

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