कर्नाटक हाई कोर्ट ने EPS-95 पेंशन योजना में 2007 के संशोधनों को बरकरार रखा है। सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने दलील दी थी कि इन बदलावों से उनके मासिक लाभ कम हुए और अर्जित अधिकार छिन गए। अदालत ने 14 अक्टूबर, 2026 को सेवानिवृत्त कर्मचारियों के खिलाफ फैसला सुनाते हुए कहा कि संशोधनों को रद्द करने का कोई आधार नहीं है।
मुख्य बातें
- चुनौती दिए गए बदलावों के तहत समय से पहले पेंशन लेने पर कटौती की दर, 58 वर्ष की आयु से कम प्रत्येक वर्ष के लिए 3% से बढ़ाकर 4% कर दी गई।
- सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने दलील दी कि संशोधनों ने वे लाभ हटा दिए जिनके वे पहले से हकदार थे; EPFO ने कहा कि बदलावों से विसंगतियां दूर हुईं।
- अदालत ने माना कि केंद्र सरकार को योजना में संशोधन करने का अधिकार था।
EPS-95 पेंशन नियम में कैसे बदलाव हुआ
कर्मचारी पेंशन योजना, 1995 के तहत कोई सदस्य 58 वर्ष की आयु से पहले, लेकिन 50 वर्ष से पहले नहीं, घटाई गई मासिक पेंशन ले सकता है। पहले के प्रावधान के अनुसार, सदस्य की आयु 58 वर्ष से जितने वर्ष कम होती, पेंशन में प्रत्येक वर्ष के लिए 3% की कटौती की जाती थी। 2007 के संशोधन ने यह दर बदलकर 4% कर दी।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों द्वारा दिए गए उदाहरण के अनुसार, ₹1,100 प्रति माह की पेंशन पाने का हकदार कोई व्यक्ति यदि 52 वर्ष की आयु में पेंशन लेना शुरू करे, तो उसे पहले की दर के तहत ₹902 और संशोधित दर के तहत ₹836 मिलेंगे। ये आंकड़े एक उदाहरण हैं, हर सदस्य की पात्रता की गणना नहीं।
| मद | विवरण |
|---|---|
| समय से पहले पेंशन की पात्रता | 58 वर्ष की आयु से पहले, लेकिन 50 वर्ष से पहले नहीं |
| संशोधन से पहले कटौती | 58 वर्ष से कम प्रत्येक वर्ष के लिए 3% |
| संशोधन के बाद कटौती | 58 वर्ष से कम प्रत्येक वर्ष के लिए 4% |
| अदालत का फैसला | 14 अक्टूबर, 2026; संशोधन बरकरार रखे गए |
सेवानिवृत्त कर्मचारियों की चुनौती क्यों खारिज हुई
सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने दलील दी कि मूल योजना के तहत अर्जित लाभों को बाद के संशोधन से छीना नहीं जा सकता। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन, यानी EPFO, ने दलील दी कि 2007 की अधिसूचनाएं स्पष्टीकरण देने वाली थीं और उन्होंने अर्जित अधिकारों को हटाने के बजाय विसंगतियां दूर कीं।
Khaitan & Co के पार्टनर वैभव भारद्वाज ने कहा कि कानून केंद्र सरकार को योजना में पूर्वव्यापी संशोधन करने की अनुमति देता है। उन्होंने कहा कि प्रतिस्थापित प्रावधान को ऐसे माना जाता है मानो वह 1995 से लागू रहा हो, जिससे यह दावा कमजोर पड़ता है कि 2007 के संशोधन से पहले सेवानिवृत्त होने पर पुराने प्रावधान के तहत अधिकार सुरक्षित हो गए थे।
भारद्वाज ने कहा कि अदालत ने यह भी माना कि ₹800 की न्यूनतम राशि कुल पेंशन पर लागू होती थी, न कि केवल पिछली सेवा के घटक पर, और EPFO ने शुरू से इसी आधार पर पेंशन की गणना की थी। उन्होंने कहा कि अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के 2022 के उस दृष्टिकोण का पालन किया कि न्यायाधीशों को पेंशन योजना की संरचना में हस्तक्षेप करने से बचना चाहिए।
संशोधनों की स्थिति
संशोधन 2007 में किए गए थे; अक्टूबर 2026 के फैसले ने उन्हें बरकरार रखा, कोई नया नियम लागू नहीं किया। उपलब्ध जानकारी में अधिसूचना की तारीख निर्दिष्ट नहीं है।
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