भारत के सुप्रीम कोर्ट ने उन विधायकों के तमिलनाडु में दिए गए इस्तीफों को चुनौती देने वाली याचिका पर जवाब मांगे हैं, जिन्होंने दल बदले थे। इससे दल-बदल विरोधी नियमों और उपचुनावों की सार्वजनिक लागत पर सवाल उठे हैं।
मुख्य बातें
- अदालत ने केंद्र सरकार, निर्वाचन प्राधिकारियों और AIADMK के छह पूर्व विधायकों को नोटिस जारी किए।
- याचिकाकर्ता का तर्क है कि अयोग्यता पर फैसले से पहले इस्तीफा देकर दल-बदल विरोधी नियमों से बचा जा सकता है।
तमिलनाडु में इस्तीफों को चुनौती
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अधिवक्ता के. सुथन की अपील पर नोटिस जारी किए। अपील में मद्रास हाई कोर्ट के 24 सितंबर के उस फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें AIADMK विधायकों—जिनमें एस. जयकुमार भी शामिल हैं—के इस्तीफे और सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के प्रति निष्ठा बदलने से जुड़ी उनकी याचिका खारिज कर दी गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने भारत निर्वाचन आयोग, तमिलनाडु के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, राज्य विधानसभा के सचिव और AIADMK के छह पूर्व विधायकों को भी नोटिस जारी किए।
याचिका में क्या तर्क दिया गया है
सुथन ने कहा कि विधायकों ने मई 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद अपनी पार्टी के व्हिप के खिलाफ विश्वास प्रस्ताव पर मतदान किया था। उन्होंने कहा कि दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता संबंधी याचिकाएं अध्यक्ष के समक्ष लंबित रहने के दौरान विधायकों ने इस्तीफा दे दिया और उसी दिन उनके इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए।
याचिका में तर्क दिया गया है कि अयोग्यता पर फैसले से पहले इस्तीफा देकर और फिर किसी अन्य पार्टी के चुनाव चिह्न पर उपचुनाव लड़कर विधायक दल-बदल विरोधी नियमों से बच सकते हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि इन चुनावों का खर्च जनता उठाती है।
याचिका में कहा गया कि धारापुरम और मदुरांतकम सीटों से इस्तीफा देने वाले विधायकों को उन्हीं सीटों के लिए सत्तारूढ़ पार्टी का उम्मीदवार घोषित किया गया।
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