भारत सरकार 137 गैर-अनुसूचित कैंसर दवाओं पर 30% की व्यापार मार्जिन सीमा लागू करने की तैयारी कर रही है। दवा कंपनियां 9 नवंबर, 2026 की कार्यान्वयन समय-सीमा की दिशा में काम कर रही हैं। सरकार को उम्मीद है कि कैंसर दवाओं की कीमतें घटेंगी, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कुछ लागतें दूसरी सेवाओं पर स्थानांतरित हो सकती हैं।
मुख्य बातें
- सरकार का अनुमान है कि अधिकतम खुदरा कीमतें 20% से 70% तक घट सकती हैं, जिससे सालाना लगभग ₹2,500 करोड़ की बचत होगी।
- 30% की सीमा व्यापार मार्जिन पर लागू होती है; इसका मतलब यह नहीं है कि हर दवा की खुदरा कीमत में निश्चित रूप से 30% की कटौती होगी।
- अस्पतालों और वकालत समूहों से जुड़े कुछ लोगों को चिंता है कि सेवा प्रदाता अन्य शुल्कों के ज़रिये लागत की भरपाई कर सकते हैं।
यह सीमा कैंसर दवाओं की कीमतों को कैसे प्रभावित कर सकती है
इस सीमा का उद्देश्य केमिस्टों और अस्पतालों के ज़रिये बेची जाने वाली दवाओं पर असर डालना है। सरकार ने एक हलफनामे में कहा कि प्रस्तावित कदम से मरीजों का अपनी जेब से होने वाला खर्च घटेगा और कीमतों में पारदर्शिता बढ़ेगी।
सरकार ने विनियमन के कारणों में मरीजों की सीमित मोलभाव क्षमता और दवाओं, विकल्पों तथा कीमतों के बारे में सीमित जानकारी का उल्लेख किया। कीमतों में कटौती और बचत के उसके अनुमान पूर्वानुमान हैं, दर्ज किए गए नतीजे नहीं।
स्रोत में इन दवाओं के लिए पहले लागू व्यापार मार्जिन नियमों या अलग से किसी प्रभावी तिथि का उल्लेख नहीं है। इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस के सुदर्शन जैन ने कहा कि कंपनियां 9 नवंबर तक कार्यान्वयन के लिए काम कर रही हैं और कीमतों में कटौती के बारे में उपभोक्ताओं को सूचित करेंगी।
उपचार के अन्य खर्चों को लेकर चिंता
स्वास्थ्य सेवा प्रशासक एन. संथानम ने कहा कि उद्योग इस सीमा का भार उठा सकता है, लेकिन उनका तर्क था कि वहनीयता के उपायों में अन्य चिकित्सीय क्षेत्रों की महंगी दवाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए।
अस्पताल और उद्योग प्रतिनिधियों ने आगाह किया कि सेवा प्रदाता अन्य सेवाओं के ज़रिये लागत की भरपाई करने की कोशिश कर सकते हैं, जिनमें ऐसी सेवाएं भी शामिल हैं जिनका पहले बिल नहीं लिया जाता था। यह उनके द्वारा जताया गया जोखिम है, नई सीमा का पुष्ट परिणाम नहीं।
एक्सेस टू मेडिसिन्स एंड ट्रीटमेंट्स पर कार्यसमूह के सह-संयोजक केएम गोपाकुमार ने कहा कि हर महीने कई खुराक की ज़रूरत वाले मरीजों के लिए कैंसर की दवाएं महंगी बनी रह सकती हैं। उन्होंने लागत को डायग्नोस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में स्थानांतरित होने से रोकने के लिए अस्पताल की अन्य सेवाओं पर अधिकतम कीमतें तय करने की मांग की।
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