26 अक्टूबर, 2026 को सुबह 11:10 बजे IST तक रुपये की विनिमय दर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.18% कमजोर होकर 95.1150 पर आ गई। कारोबार की शुरुआत मोटे तौर पर अपरिवर्तित स्तर पर हुई थी। सुबह की गिरावट के साथ आयातकों की डॉलर खरीद और इंटरबैंक बाजार में डॉलर की लंबी पोज़िशनों में मामूली बढ़ोतरी भी हुई।

मुख्य बातें

  • पिछले सप्ताह 6% से अधिक बढ़ने के बाद एशियाई कारोबार में ब्रेंट क्रूड 115 डॉलर प्रति बैरल के करीब बना रहा।
  • भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 16 अक्टूबर तक लगातार छठे सप्ताह घटकर 721 अरब डॉलर पर आ गया।

डॉलर की मांग से रुपये की विनिमय दर पर दबाव

आयातकों की डॉलर खरीद और अमेरिकी मुद्रा के पक्ष में इंटरबैंक पोज़िशनों में बढ़ोतरी के बीच सुबह के कारोबार में रुपया कमजोर हुआ। यह गिरावट ऐसे समय आई जब तेल की कीमतें भी ऊंची बनी हुई थीं।

भारतीय रिजर्व बैंक की डॉलर बिक्री ने हाल के कारोबारी सत्रों में रुपये को सहारा दिया था, लेकिन 26 अक्टूबर को यह समर्थन नहीं मिला। पिछले सप्ताहों में, हस्तक्षेप और Jio Platforms के IPO से जुड़े प्रवाहों ने मुद्रा को 96.70 प्रति डॉलर के करीब के स्तरों से उबरने में मदद की थी।

तेल की कीमतों और भंडार पर नजर

सऊदी अरब पर हमलों के बाद आपूर्ति में व्यवधान की चिंताओं के बीच पिछले सप्ताह ब्रेंट क्रूड 6% से अधिक बढ़कर छह महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया। तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल को बढ़ाती हैं और मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ा सकती हैं।

16 अक्टूबर तक के सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 5 अरब डॉलर घटा और सितंबर के पहले सप्ताह के अपने सर्वकालिक उच्च स्तर से 64 अरब डॉलर से अधिक नीचे रहा। बैंकरों ने गिरावट के एक हिस्से का कारण रुपये को समर्थन देने के लिए RBI की हाजिर डॉलर बिक्री और रुपये की तरलता के प्रबंधन के लिए इस्तेमाल किए गए सेल/बाय स्वैप को बताया।

अगला अहम पड़ाव

उस सप्ताह के बाद के दिनों में फेडरल रिजर्व का नीतिगत फैसला अगली प्रमुख घटना थी। ब्याज दरों में ठहराव की व्यापक रूप से उम्मीद थी और दरों के परिदृश्य पर मार्गदर्शन पर नजर थी।

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