सितंबर 2026 में भारत का कोर उत्पादन सालाना आधार पर 7.9% बढ़ा। अगस्त के 5.9% की तुलना में वृद्धि तेज़ हुई, क्योंकि कोयला उत्पादन में वापसी हुई और रिफाइनरी उत्पादों तथा लौह अयस्क का उत्पादन अधिक तेज़ी से बढ़ा। 21 अक्टूबर को जारी आंकड़ों में संशोधित सूचकांक की सबसे मजबूत वृद्धि दर्ज हुई, हालांकि सितंबर इसकी केवल चौथी मासिक रीडिंग थी।

मुख्य बातें

  • सितंबर में वृद्धि 7.9% रही, जबकि अगस्त में 5.9% और एक साल पहले 3.1% थी।
  • कोयला उत्पादन फिर बढ़ा, जबकि रिफाइनरी उत्पादों और लौह अयस्क में तेज़ी से वृद्धि हुई।
  • संशोधित सूचकांक में नौ उद्योग शामिल हैं, लेकिन उर्वरक, प्राकृतिक गैस और कच्चा तेल अब भी संकुचन में रहे।

विषय-सूची

संशोधित श्रृंखला में भारत का कोर उत्पादन उच्च स्तर पर

सितंबर के आंकड़े ने बुनियादी ढांचे से जुड़ा उत्पादन बेहतर होने का सिलसिला आगे बढ़ाया, जिसे पिछले साल की अनुकूल तुलना का सहारा मिला। सितंबर 2025 में वृद्धि 3.1% रही थी।

संशोधित सूचकांक में आधार वर्ष 2011–12 की जगह 2022–23 रखा गया है और लौह अयस्क को शामिल कर कोर उद्योगों की संख्या नौ की गई है। इसलिए श्रृंखला में अब तक की सबसे ऊंची वृद्धि का यह उल्लेख नए ढांचे पर लागू होता है, न कि बिना किसी सीमा वाले ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर।

ICRA की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि अनुकूल आधार ने वृद्धि तेज़ होने में मदद की। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने बुनियादी ढांचा उद्योगों की मजबूती को सरकारी खर्च से जोड़ा। इसमें सड़क पर होने वाला खर्च सीमेंट की मांग को और रेलवे का व्यय लौह एवं इस्पात की मांग को सहारा देता है।

मदविवरण
बिजलीसितंबर में सालाना वृद्धि: 11.4%; अगस्त: 13.1%।
इस्पातसितंबर में वृद्धि: 4.9%; अगस्त: 3.5%। सितंबर में तीन महीने की सबसे तेज़ वृद्धि रही।
सीमेंटसितंबर में वृद्धि: 9.8%; अगस्त: 11.7%।
उर्वरकसितंबर में उत्पादन 11.7% गिरा; अगस्त में 12.4% गिरा था।
प्राकृतिक गैससितंबर में उत्पादन सालाना आधार पर 4.6% गिरा।
कच्चा तेलसितंबर में उत्पादन सालाना आधार पर 1.4% गिरा।

कोयला उत्पादन में वापसी, रिफाइनरी और लौह अयस्क की वृद्धि तेज़

कोयला उत्पादन एक साल पहले की तुलना में 10.7% बढ़ा, जबकि अगस्त में इसमें 3.8% की गिरावट आई थी। नायर ने कहा कि सुधार को कम आधार से मदद मिली, लेकिन बिजली संयंत्रों में कोयले का भंडार कम होने के बीच क्रमिक आधार पर हुई मजबूत वृद्धि की ओर भी उन्होंने ध्यान दिलाया।

रिफाइनरी उत्पादों में 10.3% की वृद्धि हुई, जो अगस्त के 5.6% से अधिक और नई श्रृंखला में सबसे ऊंची रीडिंग थी। सबनवीस ने कहा कि ईंधन की बढ़ी हुई मांग और निर्यात ने उत्पादन को सहारा दिया। लौह अयस्क का उत्पादन 18.4% बढ़ा, जबकि अगस्त में वृद्धि 5.5% थी।

सुधार सभी क्षेत्रों में समान नहीं था। बिजली और सीमेंट का उत्पादन तेज़ी से बढ़ता रहा, लेकिन अगस्त के मुकाबले इसकी रफ्तार धीमी हुई, जबकि इस्पात उत्पादन की वृद्धि तेज़ हुई। उर्वरक, प्राकृतिक गैस और कच्चे तेल का उत्पादन एक साल पहले के स्तर से नीचे रहा।

औद्योगिक उत्पादन के पूर्वानुमान अब भी अलग-अलग

भारतीय आर्थिक सेवा की कोर उद्योग सूचकांक की व्याख्या इसे उत्पादन-मात्रा का ऐसा माप बताती है जिसका उद्देश्य व्यापक औद्योगिक गतिविधि का अग्रिम संकेत देना है। यह संदर्भ पुराने आठ-उद्योग ढांचे को कवर करता है, संशोधित नौ-उद्योग श्रृंखला को नहीं।

बैंक ऑफ बड़ौदा ने सितंबर के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 7.5–8.5% वृद्धि का अनुमान लगाया है। ICRA को 6–7% की कम वृद्धि की उम्मीद है, जो अगस्त के 8% से नीचे होगी, क्योंकि तुलना का ऊंचा आधार कोर समूह से बाहर के उद्योगों पर दबाव डाल सकता है।

ये अनुमान हैं, सितंबर के जारी किए गए IIP नतीजे नहीं। केवल कोर उत्पादन के मजबूत आंकड़े से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि बाकी औद्योगिक उत्पादन का प्रदर्शन कैसा रहा।

निष्कर्ष

सितंबर में वृद्धि तेज़ होने के पीछे कोयला, रिफाइनरी और लौह अयस्क का मजबूत उत्पादन तथा अनुकूल आधार प्रभाव शामिल थे। अब अगली नज़र सितंबर के IIP आंकड़ों पर रहेगी, जिनसे पता चलेगा कि सुधार कोर उद्योगों से आगे भी फैला या नहीं।

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