भारतीय शेयरों में FII की बिकवाली 23 अक्टूबर, 2026 तक लगातार 10वें सप्ताह जारी रही, हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों का शुद्ध बहिर्वाह काफी धीमा पड़ा। छुट्टियों के कारण छोटे कारोबारी सप्ताह में निफ्टी 50 2.4% गिरकर 22,600 पर आ गया, जबकि छोटी कंपनियों के शेयरों में इससे भी बड़ी गिरावट ने दिखाया कि निरंतर घरेलू संस्थागत खरीदारी व्यापक गिरावट को रोक नहीं पाई।
मुख्य बातें
- विदेशी संस्थागत निवेशकों की साप्ताहिक शुद्ध बिकवाली घटकर 26,970 करोड़ रुपये रह गई, जो पहले 89,910 करोड़ रुपये थी।
- घरेलू संस्थान लगातार 10वें सप्ताह शुद्ध खरीदार बने रहे और उन्होंने 1,09,420 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।
- तेल और मूल्यांकन संबंधी चिंताएँ बनी रहने के कारण स्मॉल-कैप और मिड-कैप शेयरों में निफ्टी 50 से अधिक गिरावट आई।
विषय-सूची
- FII की बिकवाली धीमी, लेकिन साप्ताहिक रुझान नहीं पलटा
- छोटी कंपनियों को अधिक नुकसान
- तकनीकी स्तरों पर दबाव बरकरार
- फेड बैठक और आय के नतीजे होंगे अगली कसौटी
- निष्कर्ष
FII की बिकवाली धीमी, लेकिन साप्ताहिक रुझान नहीं पलटा
विदेशी संस्थान सप्ताह के चार कारोबारी सत्रों में से दो में शुद्ध खरीदार रहे, लेकिन उनकी खरीदारी साप्ताहिक बहिर्वाह को पलटने के लिए पर्याप्त नहीं थी। घरेलू संस्थागत निवेशकों ने अपनी 10 सप्ताह की खरीदारी की लय जारी रखी और विदेशी बिकवाली के मुकाबले संतुलन प्रदान किया।
यह अंतर महत्वपूर्ण है: बिकवाली में कमी विदेशी पूंजी की निकासी धीमी होने का संकेत है, न कि विदेशी पूंजी की निरंतर वापसी का। घरेलू संस्थानों की पर्याप्त खरीदारी के बावजूद निफ्टी हर सत्र में गिरा और शुक्रवार को सप्ताह के भीतर 22,372 के निचले स्तर पर पहुंचा।
बजाज ब्रोकिंग में अनुसंधान के उपाध्यक्ष पबित्रो मुखर्जी ने कहा कि बिकवाली में नरमी से कुछ राहत मिली, लेकिन कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और व्यापक बाजार में तेज कमजोरी ने गिरावट के जोखिम को बनाए रखा।
| मद | विवरण |
|---|---|
| बैंक निफ्टी | 23 अक्टूबर, 2026 को समाप्त सप्ताह में 2.8% नीचे। |
| निफ्टी मिडकैप 100 | सप्ताह में 5.6% नीचे। |
| निफ्टी स्मॉलकैप 100 | सप्ताह में 7.3% नीचे। |
| अक्टूबर में अब तक विदेशी निवेश प्रवाह | शेयरों की शुद्ध बिक्री 5,14,660 करोड़ रुपये। |
| अक्टूबर में अब तक घरेलू निवेश प्रवाह | शेयरों की शुद्ध खरीद 5,91,100 करोड़ रुपये। |
छोटी कंपनियों को अधिक नुकसान
सबसे बड़ी कंपनियों से बाहर बिकवाली काफी अधिक गंभीर रही। मिड-कैप और स्मॉल-कैप, दोनों बेंचमार्क निफ्टी 50 से कमजोर रहे, जबकि बैंकिंग शेयर भी गिरावट के साथ बंद हुए।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में अनुसंधान प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने मुद्रास्फीति संबंधी चिंताएँ तेज कर दीं और घरेलू प्रतिफल में वृद्धि से शेयरों के मूल्यांकन पर नए सिरे से सवाल उठे। उन्होंने छोटी कंपनियों में अधिक तेज गिरावट के लिए मूल्यांकन संबंधी चिंताओं और लीवरेज वाली पोजीशन के समापन को आंशिक रूप से जिम्मेदार बताया।
क्षेत्रों का प्रदर्शन एकसमान नहीं रहा। नायर ने सूचना प्रौद्योगिकी को मजबूती का मुख्य क्षेत्र बताया; शुरुआती बिकवाली से उबरने के बाद यह मोटे तौर पर अपरिवर्तित बंद हुआ। इनपुट लागत और मार्जिन को लेकर चिंताएँ फिर उभरने से उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं, धातुओं और रियल एस्टेट पर अधिक दबाव पड़ा।
तकनीकी स्तरों पर दबाव बरकरार
एलकेपी सिक्योरिटीज के तकनीकी विश्लेषक वत्सल भुवा ने कहा कि निफ्टी अपने 200-सप्ताह और 20-दिवसीय मूविंग एवरेज से नीचे गिर गया था। उनके आकलन में, लगातार बन रहे निचले उच्च स्तरों का पैटर्न संकेत देता था कि हालिया सुधार टिकाऊ रुझान-पलटाव के बजाय राहत रैली था।
भुवा ने 22,500 पर निकटवर्ती सपोर्ट और 22,200 पर अधिक महत्वपूर्ण स्तर की पहचान की, जबकि 22,700 से 22,800 के बीच रेजिस्टेंस बताया। ये तकनीकी संदर्भ स्तर हैं, आगे के कारोबार की सुनिश्चित सीमाएँ नहीं।
फेड बैठक और आय के नतीजे होंगे अगली कसौटी
फेडरल रिजर्व के FOMC बैठक कैलेंडर के अनुसार अगली नीतिगत बैठक 27–28 अक्टूबर, 2026 को निर्धारित है। मुद्रास्फीति के जोखिम और वैश्विक वृद्धि का आकलन करते समय यह निर्णय निवेशकों को अमेरिकी मौद्रिक नीति का नया संकेत देगा।
मुखर्जी ने अमेरिकी GDP के आँकड़ों, ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतों, भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और तिमाही आय को भी निवेशक धारणा पर असर डालने वाले अहम कारकों के रूप में बताया। भारत में आगामी औद्योगिक उत्पादन के आँकड़े और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की प्रगति भी निवेशकों की निगरानी सूची में हैं।
केवल विदेशी बिकवाली धीमी पड़ने से यह साबित नहीं होता कि बाजार ने निचला स्तर बना लिया है। अगली कसौटी यह होगी कि संस्थागत निवेश प्रवाह में सुधार के साथ छोटी कंपनियों के शेयरों में भी कीमतें अधिक स्थिर होती हैं या मजबूती कुछ ही क्षेत्रों तक सीमित रहती है।
निष्कर्ष
FII की बिकवाली धीमी हुई, लेकिन सप्ताह की गिरावट ने व्यापक सुधार के बहुत कम संकेत छोड़े। 27–28 अक्टूबर की फेड बैठक अगली पुष्ट नीतिगत घटना है जिस पर नजर रखनी होगी। इसके साथ तिमाही आय और यह भी देखना होगा कि विदेशी खरीदारी अधिक निरंतर होती है या नहीं।
और खबरें पढ़ें
अस्वीकरण
FinanceVelix का यह लेख सामान्य जानकारी प्रदान करता है, व्यक्तिगत वित्तीय, निवेश, कानूनी या कर संबंधी सलाह नहीं। बाजार मूल्य, ब्याज दरें और आर्थिक परिस्थितियाँ बदल सकती हैं; निवेश में नुकसान का जोखिम होता है। तथ्य प्रकाशन के समय उपलब्ध सामग्री पर आधारित हैं और बदल सकते हैं। महत्वपूर्ण जानकारी की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें और आवश्यकता पड़ने पर किसी योग्य पेशेवर से सलाह लें। किसी परिसंपत्ति, कंपनी या सेवा का उल्लेख समर्थन या अनुशंसा नहीं है।




