25 अक्टूबर तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में अब तक भारतीय शेयरों से FPI का बहिर्वाह Rs 48,056 करोड़ तक पहुंच गया, जिससे 2026 में कुल निकासी Rs 3.08 लाख करोड़ हो गई। इसके बावजूद, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 23 अक्टूबर को समाप्त सप्ताह में बिकवाली घटाई और दो कारोबारी दिनों में शुद्ध खरीदार रहे।
मुख्य बातें
- अक्टूबर में शेयरों से निकासी पहले ही सितंबर के पूरे महीने के Rs 35,861 करोड़ के बहिर्वाह से अधिक हो चुकी है।
- रणनीतिकारों ने महंगे तेल, आय को लेकर चिंताओं और आकर्षक अमेरिकी ब्याज दरों को विदेशी निवेश पर दबाव डालने वाले कारकों के रूप में बताया।
- दो सत्रों में शुद्ध खरीदारी से संकेत मिलता है कि बिकवाली का दबाव कम हुआ, लेकिन इससे विदेशी पूंजी की सतत वापसी साबित नहीं होती।
विषय-सूची
- FPI का बहिर्वाह पिछले साल के कुल स्तर से अधिक
- तेल और आय संबंधी चिंताओं से निवेश आवंटन पर दबाव
- अक्टूबर के आखिर में खरीदारी से सीमित राहत
- निष्कर्ष
FPI का बहिर्वाह पिछले साल के कुल स्तर से अधिक
2026 में भारतीय शेयरों से निकाले गए Rs 3.08 लाख करोड़, 2025 के पूरे साल में निकाले गए Rs 1.66 लाख करोड़ से काफी अधिक हैं। अक्टूबर के आंकड़े अभी आंशिक महीने के हैं, इसलिए सितंबर से तुलना महत्वपूर्ण है: निकासी उस महीने के कुल स्तर को पहले ही पार कर चुकी है।
यह बिकवाली जुलाई और अगस्त में शुद्ध निवेश के बाद आई है। उन महीनों में आई रकम सितंबर और अक्टूबर में फिर से शुरू हुई निकासी को रोक नहीं पाई।
CDSL की कैलेंडर-वर्ष FPI निवेश पद्धति के अनुसार, यह शृंखला SEBI या डिपॉजिटरी को सौंपे गए नामित डिपॉजिटरी प्रतिभागियों और कस्टोडियन की रिपोर्टों से संकलित की जाती है और इसमें पिछले कारोबारी दिनों के सौदे शामिल होते हैं। रिपोर्टिंग का यह आधार दर्ज निवेश प्रवाह को वास्तविक समय की बाजार गतिविधि से अलग पहचानने में मदद करता है।
| मद | विवरण |
|---|---|
| जुलाई 2026 | Rs 20,200 करोड़ का शुद्ध शेयर निवेश। |
| अगस्त 2026 | Rs 29,631 करोड़ का शुद्ध शेयर निवेश। |
| सितंबर 2026 | Rs 35,861 करोड़ का शुद्ध शेयर बहिर्वाह। |
| पूरा वर्ष 2025 | Rs 1.66 लाख करोड़ का शुद्ध शेयर बहिर्वाह। |
तेल और आय संबंधी चिंताओं से निवेश आवंटन पर दबाव
Choice Wealth के मुख्य निवेश रणनीति अधिकारी धीरज गौर ने विदेशी बिकवाली के लिए मध्य पूर्व में तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमत करीब $114 प्रति बैरल होना, कमजोर कॉरपोरेट आय, महंगाई संबंधी चिंताएं और घरेलू तरलता को लेकर अनिश्चितता को जिम्मेदार बताया। उन्होंने वैश्विक पोर्टफोलियो के पुनः आवंटन का भी उल्लेख किया।
MIRA Money के सह-संस्थापक आनंद के. राठी ने मौजूदा नतीजों और भविष्य के जोखिमों के बीच अंतर बताया। उन्होंने कहा कि दूसरी तिमाही के नतीजे अपेक्षाकृत मजबूत रहे थे, लेकिन तेल और लॉजिस्टिक्स की ऊंची लागत आने वाली तिमाहियों में आय वृद्धि पर दबाव डाल सकती है।
राठी ने कहा कि ऊंची अमेरिकी ब्याज दरें अमेरिकी परिसंपत्तियों को आकर्षक बनाए हुए हैं। इस बीच, घरेलू संस्थागत निवेश और व्यवस्थित निवेश योजना (SIP) में योगदान ने विदेशी बिकवाली के असर को कम करने में मदद की, न कि उसे पूरी तरह समाप्त करने में।
अक्टूबर के आखिर में खरीदारी से सीमित राहत
Geojit Investments के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी. के. विजयकुमार ने बिकवाली में कमी को अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में गिरावट, रुपये की मजबूती और अधिक आकर्षक मूल्यांकन से जोड़ा, खासकर लार्ज-कैप शेयरों में। उन्होंने बताया कि अमेरिकी 10-वर्षीय यील्ड 5.36% से घटकर करीब 5% हो गई और रुपया मजबूत होकर प्रति डॉलर 94.94 पर पहुंच गया।
ये बाजार रणनीतिकार द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण हैं, न कि इस बात का प्रमाण कि हर विदेशी निवेशक के कारोबार के पीछे यही कारण था। दो दिनों की शुद्ध खरीदारी ऐसे महीने के दौरान भी हुई, जिसका कुल प्रदर्शन अब भी काफी नकारात्मक है।
Bajaj Broking के शोध विभाग के उपाध्यक्ष पबित्रो मुखर्जी ने आने वाले सप्ताह में फेडरल रिजर्व और बैंक ऑफ जापान के नीतिगत फैसलों, अमेरिकी GDP आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों और जारी कॉरपोरेट आय रिपोर्टों को ऐसे अगले घटनाक्रम बताया जिन पर निवेशक नजर रखेंगे।
निष्कर्ष
अक्टूबर के आखिर में बिकवाली की रफ्तार कम होने के बावजूद FPI का बहिर्वाह काफी बड़ा बना रहा। आने वाले सप्ताह के केंद्रीय बैंक के फैसले और जारी आय रिपोर्टें यह आकलन करने के अगले पड़ाव होंगे कि क्या सुधार कुछ कारोबारी सत्रों से आगे भी कायम रहता है।
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