Citi India का संस्थागत ग्राहक-परिसंपत्ति पोर्टफोलियो दूसरी तिमाही में ₹1 लाख करोड़ के पार पहुँच गया। उपभोक्ता बैंकिंग से बाहर निकलने के बाद विस्तार में यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। 25 अक्टूबर, 2026 को प्रकाशित एक साक्षात्कार में CEO K Balasubramanian ने कहा कि बैंक को इस पोर्टफोलियो में साल-दर-साल लगभग 20% वृद्धि की उम्मीद है, जबकि वह फंडिंग लागत और अंडरराइटिंग के मामले में चयनात्मक बना रहेगा।

मुख्य बातें

  • संस्थागत ग्राहक-परिसंपत्ति पोर्टफोलियो ₹1 लाख करोड़ से अधिक रहा, जबकि बैलेंस शीट में साल-दर-साल 16.3% वृद्धि हुई।
  • Citi दो या तीन संभावित अरब डॉलर के दायरे वाले लेनदेन में शामिल है, जिनके 2026 के अंत से पहले होने की उम्मीद है।
  • मार्च 2027 में Axis Bank के साथ गैर-प्रतिस्पर्धा समझौते की अवधि समाप्त होने से अवसर खुल सकते हैं, लेकिन किसी नए कारोबार की शुरुआत की घोषणा नहीं की गई।

विषय-सूची

Citi India ने अपने संस्थागत कारोबार का विस्तार किया

Balasubramanian ने कहा कि ₹1 लाख करोड़ की यह उपलब्धि Citi के रुपये में ग्राहक-परिसंपत्ति पोर्टफोलियो के उस आकार से भी अधिक है, जब उसका उपभोक्ता कारोबार अभी चल रहा था। बैंक की बैलेंस शीट ₹3.14 लाख करोड़ तक पहुँच गई।

Citi द्वारा भारत में अपने उपभोक्ता कारोबार की बिक्री पूरी करने का सौदा 1 मार्च, 2023 को Axis Bank के साथ हुआ था। इसमें क्रेडिट कार्ड, रिटेल बैंकिंग, वेल्थ मैनेजमेंट और उपभोक्ता ऋण शामिल थे। संस्थागत ग्राहक कारोबार इसमें शामिल नहीं थे, जो Citi के भारत में जारी परिचालन का मुख्य आधार बने रहे।

इस कारोबार से निकलने के बाद बैंक ने पूंजी और प्रबंधन का ध्यान संस्थागत बैंकिंग की ओर मोड़ा। Balasubramanian के अनुसार, मार्च 2023 से मार्च 2026 के बीच उपभोक्ता परिचालन को छोड़कर संस्थागत राजस्व में 76% की वृद्धि हुई, जबकि शुद्ध आय 56% बढ़ी।

विकास की संभावना अब भी रिटर्न पर निर्भर है। उन्होंने कहा कि Citi जमा जुटाकर तेज़ी से विस्तार कर सकता है, लेकिन अगर फंडिंग बहुत महँगी हो जाए या अंडरराइटिंग के मानकों से समझौता करना पड़े, तो वह ऐसा नहीं करेगा।

मदविवरण
वित्त वर्ष 2026 का शुद्ध लाभ₹7,261 करोड़, 17.3% अधिक
वित्त वर्ष 2026 की कुल आय₹23,176 करोड़, 4.5% अधिक
ऋण वृद्धिमार्च 2023 और मार्च 2026 के बीच 78%
जमा वृद्धिमार्च 2023 और मार्च 2026 के बीच 48%

IPO पाइपलाइन से पूंजी-बाजार की महत्वाकांक्षाओं को समर्थन

Balasubramanian ने कहा कि Citi अक्टूबर के अंत से 2026 के अंत तक लगभग $1 अरब के तीन या चार लेनदेन को ध्यान में रख रहा है, जिनमें से दो या तीन में बैंक शामिल है। उन्होंने 2027 के लिए बढ़ती पाइपलाइन का भी ज़िक्र किया; एक दर्जन से अधिक कंपनियों ने ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस दाखिल किए हैं।

ये लेनदेन अभी संभावित हैं, इनके ज़रिए धन जुटाना पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि बाज़ार की स्थितियाँ इनके क्रियान्वयन को प्रभावित करेंगी, हालांकि उन्हें पाइपलाइन को लेकर आशावाद बना हुआ है।

मूल्यांकन पर Balasubramanian ने कहा कि Nifty का फॉरवर्ड प्राइस-टू-अर्निंग्स मल्टीपल लगभग 24–25 गुना से घटकर 20–21 गुना रह गया है। उनके विचार में, अगर कंपनियाँ मध्य से उच्च किशोर अंकों की वृद्धि हासिल करती हैं, तो इन मूल्यांकनों को उचित ठहराया जा सकता है। उन्होंने IPO में खुदरा निवेशकों की अप्रत्यक्ष भागीदारी के माध्यम के रूप में म्यूचुअल फंडों पर भी प्रकाश डाला।

AI में निवेश का जोखिम विदेशी पूंजी के लिए प्रतिस्पर्धा को आकार देता है

Balasubramanian ने कहा कि विदेशी निवेशक भारत के अपेक्षित रिटर्न और मूल्यांकनों की तुलना अन्य जगहों पर उपलब्ध अवसरों से करते हैं। उन्होंने ताइवान, कोरिया और संयुक्त राज्य अमेरिका को प्रतिस्पर्धी गंतव्य बताया और कहा कि वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता निवेश थीम से जुड़े भारत में दिखाई देने वाले अवसर कम हैं।

यह निवेशकों की प्राथमिकताओं के बारे में उनका आकलन है, पूंजी प्रवाह का कोई प्रमाणित एकमात्र कारण नहीं। उन्होंने इक्विटी पूंजीगत लाभ पर कराधान और व्यापार समझौतों को भी ऐसे कारकों के रूप में पहचाना, जो दीर्घकालीन निवेश को प्रभावित कर सकते हैं।

Citi के लिए संभावित UK–India और EU–India कारोबारी गलियारे सेवाओं, बाज़ारों और निवेश बैंकिंग से जुड़ा काम पैदा कर सकते हैं। Balasubramanian ने कहा कि भारत में पूंजी जुटाने पर विचार कर रही बहुराष्ट्रीय कंपनियों के साथ बैंक की कम-से-कम आधा दर्जन सक्रिय चर्चाएँ चल रही हैं; ये चर्चाएँ हैं, घोषित अधिदेश या पूरे हुए सौदे नहीं।

गैर-प्रतिस्पर्धा समझौते की समय-सीमा नज़दीक आने के साथ GIFT City का विस्तार

Citi की GIFT City परिसंपत्तियाँ मार्च 2026 में लगभग $300 मिलियन–$400 मिलियन से बढ़कर साक्षात्कार के समय करीब $2.5 अरब हो गईं। Balasubramanian ने कहा कि यह परिचालन Citi New York की एक स्वतंत्र शाखा है, इसलिए ये परिसंपत्तियाँ Citibank India की बैलेंस शीट में समेकित नहीं होतीं।

उन्होंने कहा कि Axis Bank के साथ गैर-प्रतिस्पर्धा समझौता मार्च 2027 तक लागू है। इसकी अवधि समाप्त होने के बाद Citi विदेशी मुद्रा में अनिवासी जमा के अवसरों और अपने मौजूदा ऑफशोर वेल्थ कारोबार के लिए घरेलू ग्राहकों को जोड़ने के तरीकों पर विचार कर सकता है।

इन संभावनाओं के लिए किसी शुरुआत की पुष्टि नहीं हुई है। Balasubramanian ने योजनाओं को शुरुआती चरण में बताया।

निष्कर्ष

Citi India की निकट अवधि की अगली कसौटी यह है कि क्या साल के अंत तक संभावित लेनदेन वास्तव में क्रियान्वित होते हैं। मार्च 2027 में गैर-प्रतिस्पर्धा समझौते की अवधि समाप्त होना एक अलग, पुष्ट उपलब्धि है, लेकिन अतिरिक्त कारोबारों में विस्तार का कोई भी कदम घोषित प्रतिबद्धता नहीं, बल्कि प्रबंधन के लिए एक विकल्प है।

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