सितंबर 2026 तिमाही में भारतीय कंपनियों की आय मजबूत हुई। 357 कंपनियों के शुरुआती नमूने में राजस्व सालाना आधार पर 22.1% बढ़ा और शुद्ध लाभ में 27.5% की वृद्धि हुई। 26 अक्टूबर तक उपलब्ध नतीजों में बैंकिंग और वित्त के बाहर अधिक मजबूत वृद्धि दिखी, जबकि जून तिमाही की तुलना में बैंकिंग, सूचना प्रौद्योगिकी और फार्मास्यूटिकल्स की रफ्तार धीमी पड़ी।
मुख्य निष्कर्ष
- राजस्व वृद्धि नौ तिमाहियों के उच्चतम स्तर पर पहुंची, जबकि लाभ वृद्धि जून तिमाही के 9.7% से तेज हुई।
- बैंकिंग और वित्त को छोड़कर, राजस्व 26.9% बढ़ा और शुद्ध लाभ में 33.9% की वृद्धि हुई।
- कुल परिचालन मार्जिन संकुचित हुआ, लेकिन ऋण देने के कारोबार से बाहर मार्जिन में मामूली सुधार हुआ।
विषय-सूची
- तुलनात्मक आधार नरम होने से भारतीय कंपनियों की आय को फायदा
- बैंकिंग से कुल मार्जिन पर दबाव
- आय में आईटी और ऋण देने का हिस्सा घटा
- निष्कर्ष
तुलनात्मक आधार नरम होने से भारतीय कंपनियों की आय को फायदा
पूंजीगत वस्तुओं, धातुओं, टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं, रसायनों और ऑटो सहायक उद्योगों की चुनिंदा कंपनियों ने शुरुआती नतीजों को सहारा दिया। कुल लाभ वृद्धि जून तिमाही की रफ्तार से काफी अधिक रही और राजस्व में नौ तिमाहियों की सबसे मजबूत बढ़ोतरी दर्ज हुई।
एक साल पहले का अपेक्षाकृत मामूली प्रदर्शन भी तुलना को आसान बनाने में सहायक रहा। सितंबर 2025 की समान तिमाही में राजस्व और शुद्ध लाभ क्रमशः 6.7% और 12.4% बढ़े थे।
ये आंकड़े उन कंपनियों के हैं जिन्होंने पहले ही नतीजे घोषित कर दिए थे; ये पूरे आय-घोषणा सत्र के नतीजे नहीं हैं। इसलिए कुल वृद्धि में मजबूती शुरुआती सुधार दिखाती है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि सभी सूचीबद्ध कंपनियों में भी यही रफ्तार बनी रहेगी।
| मद | विवरण |
|---|---|
| नमूने के राजस्व में ऋण देने वाले कारोबार का हिस्सा | 34.8%, एक साल पहले के 37.3% से कम |
| नमूने के शुद्ध लाभ में ऋण देने वाले कारोबार का हिस्सा | 54.6%, एक साल पहले के 56.8% से कम |
| नमूने के राजस्व में आईटी का हिस्सा | 15.5%, एक साल पहले के 16.8% से कम |
| नमूने के शुद्ध लाभ में आईटी का हिस्सा | 18.1%, एक साल पहले के 20.4% से कम |
बैंकिंग से कुल मार्जिन पर दबाव
नमूने का परिचालन मार्जिन सालाना आधार पर 150 आधार अंक घटकर 20.8% रह गया। इसका कारण बैंकिंग की कमजोर लाभप्रदता थी, क्योंकि शुद्ध ब्याज मार्जिन पर दबाव बना रहा। ऋण देने वाली कंपनियों को छोड़ने पर परिचालन मार्जिन इसके बजाय 20 आधार अंक सुधरकर 15.1% हो गया।
ऑस्ट्रेलिया के रिज़र्व बैंक की शुद्ध ब्याज मार्जिन की व्याख्या में इस माप को ब्याज अर्जित करने वाली परिसंपत्तियों के मुकाबले शुद्ध ब्याज आय के रूप में परिभाषित किया गया है। इसमें बताया गया है कि अन्य सभी स्थितियां समान रहने पर संकुचित मार्जिन से बैंक का लाभ क्यों घट सकता है। यह पृष्ठभूमि लाभप्रदता के तंत्र को स्पष्ट करती है; इससे भारत के तिमाही नतीजों की पुष्टि नहीं होती।
बैंकिंग और वित्त को हटाने पर नमूने की राजस्व और लाभ वृद्धि भी क्रमशः 26.9% और 33.9% हो गई। यह अंतर दिखाता है कि कई अन्य क्षेत्रों में अधिक मजबूत विस्तार के बावजूद ऋणदाताओं के धीमे प्रदर्शन ने मुख्य वृद्धि आंकड़ों को सीमित किया।
आय में आईटी और ऋण देने का हिस्सा घटा
एक साल पहले की तुलना में ऋण देने और आईटी, दोनों का नमूने के राजस्व और शुद्ध लाभ में हिस्सा कम रहा। इन बदलावों से पता चलता है कि अन्य क्षेत्रों की वृद्धि इन क्षेत्रों से आगे रही; हिस्सा घटने का अपने-आप में यह मतलब नहीं है कि उनका राजस्व या लाभ कम हुआ।
ग्राहकों द्वारा नई प्रौद्योगिकियों, खासकर कृत्रिम बुद्धिमत्ता, के व्यावसायिक प्रभावों का आकलन किए जाने के कारण आईटी कंपनियों की परियोजनाओं के क्रियान्वयन चक्र लंबे बने रहे। बैंकिंग और वित्त, आईटी तथा फार्मास्यूटिकल्स—तीनों में जून तिमाही की तुलना में सालाना वृद्धि धीमी रही।
आय-घोषणा सत्र से पहले, Elara Securities (India) ने 18 में से 13 क्षेत्रों में दो अंकों की बिक्री वृद्धि का अनुमान लगाया था। इनमें ऑटोमोबाइल, विवेकाधीन उपभोक्ता वस्तुएं, औद्योगिक क्षेत्र और गैर-बैंकिंग वित्तीय सेवाएं आगे थीं। ये विश्लेषकों के अनुमान थे, जो 357 कंपनियों के नमूने से अब घोषित नतीजों से अलग हैं।
निष्कर्ष
सितंबर तिमाही के बाकी नतीजे बताएंगे कि भारतीय कंपनियों की आय में शुरुआती तेजी व्यापक नमूने में भी कायम रहती है या नहीं। फिलहाल, ऋण देने के कारोबार के बाहर मजबूत वृद्धि के विपरीत बैंकिंग मार्जिन पर दबाव और आईटी तथा फार्मास्यूटिकल्स की धीमी रफ्तार दिखाई दे रही है।
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