26 अक्टूबर, 2026 को जारी एक विश्लेषण के अनुसार, 2001 में भारत के कुल क्षेत्रफल का लगभग 36.95% हिस्सा हरित आवरण के अंतर्गत था, जो 2025 में घटकर 31.35% रह गया, जबकि गैर-हरित भूमि का विस्तार हुआ।
भारत में हरित आवरण और भूमि-उपयोग में बदलाव
दिल्ली स्थित जलवायु अनुसंधान संगठन क्लाइमेट ट्रेंड्स ने पाया कि इसी अवधि में गैर-हरित भूमि 63.05% से बढ़कर 68.65% हो गई। 5.6 प्रतिशत-अंक का यह बदलाव भारत के बड़े हिस्सों में मानव-परिवर्तित और विरल वनस्पति वाले भूभागों के विस्तार को दर्शाता है।
गर्मियों के तापमान में अंतर
विश्लेषण में पाया गया कि 2001 से 2025 के बीच भूमि-आवरण की हरित और गैर-हरित श्रेणियों के औसत ग्रीष्मकालीन तापमान का अंतर लगभग 1 से 2.5 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा।
जिन क्षेत्रों में हरित आवरण घटा, वे आम तौर पर गर्मियों में अधिक तापवृद्धि के साथ मेल खाते थे, हालांकि अध्ययन के अनुसार क्षेत्रीय जलवायु कारकों ने भी तापमान वृद्धि को प्रभावित किया।
क्लाइमेट ट्रेंड्स में अनुसंधान प्रमुख पलक बाल्यान ने कहा कि वाष्पोत्सर्जन, छाया और नमी बनाए रखने के ज़रिए वनस्पति स्थानीय तापीय परिस्थितियों को नियंत्रित करने में मदद करती है।
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