15 अक्टूबर, 2026 से SBI के MCLR में पाँच अवधियों पर 15 बेसिस पॉइंट की वृद्धि हुई, जिससे तीन महीने से तीन वर्ष तक की अवधियों के लिए भारतीय स्टेट बैंक के सीमांत निधि लागत-आधारित ऋण मानदंड बढ़ गए। बैंक ने ओवरनाइट और एक महीने के मानदंडों के साथ-साथ सावधि जमा दरों को अपरिवर्तित रखा।

मुख्य बातें

  • 15 अक्टूबर, 2026 से पाँच ऋण मानदंडों में 0.15 प्रतिशत अंक की वृद्धि हुई।
  • एक वर्ष का MCLR 8.70% से बढ़कर 8.85% हो गया।
  • ओवरनाइट और एक महीने के MCLR 7.85% पर बने रहे; सावधि जमा दरें अपरिवर्तित रहीं।

विषय-सूची

SBI के MCLR में तीन महीने से तीन वर्ष तक की अवधियों पर बदलाव

SBI की अक्टूबर 2026 की MCLR अनुसूची में प्रभावित पाँचों अवधियों पर समान रूप से 15 बेसिस पॉइंट की वृद्धि दर्ज है। संशोधित मानदंड तीन महीने के लिए 8.40% से लेकर तीन वर्ष के लिए 8.95% तक हैं।

ये बदलाव चुनिंदा अवधियों पर हुए हैं, सभी परिपक्वता अवधियों में वृद्धि नहीं हुई है। दो सबसे छोटी अवधियों—ओवरनाइट और एक महीने—के मानदंड अपने पिछले स्तरों पर बने हुए हैं। 15 बेसिस पॉइंट की वृद्धि का अर्थ 0.15 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी है, 15% की नहीं।

उधारकर्ता के लिए संबंधित तुलना ऋण समझौते में निर्दिष्ट मानदंड से होती है। प्रकाशित MCLR में बदलाव से अपने-आप यह तय नहीं होता कि किसी व्यक्तिगत ऋण की किस्त में बदलाव कब या कितना होगा; यह लागू ऋण शर्तों और रीसेट व्यवस्था पर निर्भर करता है।

मदविवरण
ओवरनाइटपहले 7.85%; 15 अक्टूबर, 2026 से 7.85%।
एक महीनापहले 7.85%; 15 अक्टूबर, 2026 से 7.85%।
तीन महीनेपहले 8.25%; 15 अक्टूबर, 2026 से 8.40%।
छह महीनेपहले 8.60%; 15 अक्टूबर, 2026 से 8.75%।
एक वर्षपहले 8.70%; 15 अक्टूबर, 2026 से 8.85%।
दो वर्षपहले 8.75%; 15 अक्टूबर, 2026 से 8.90%।
तीन वर्षपहले 8.80%; 15 अक्टूबर, 2026 से 8.95%।

ऋण मानदंड में वृद्धि RBI के नीतिगत कदम के बाद

यह संशोधन भारतीय रिज़र्व बैंक के 7 अक्टूबर, 2026 के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें रेपो दर को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.25% से 5.50% किया गया था। प्रभावित पाँच MCLR में SBI की वृद्धि उस नीतिगत दर की वृद्धि से कम थी।

रेपो दर और MCLR अलग-अलग दरें हैं: पहली केंद्रीय बैंक की नीतिगत दर है, जबकि दूसरी बैंक का ऋण मानदंड है। समय का यह संयोग यह नहीं दर्शाता कि SBI की हर ऋण दर में समान राशि की वृद्धि हुई।

सावधि जमा दरें अपरिवर्तित रखी गईं, इसलिए घोषित ऋण-मानदंड वृद्धि के साथ उन जमा दरों में समानांतर बढ़ोतरी नहीं हुई।

निष्कर्ष

संशोधित मानदंड 15 अक्टूबर, 2026 से लागू हुए। प्रभावित उधारकर्ताओं के लिए अगला प्रासंगिक पड़ाव ऋण का संविदात्मक रीसेट है, न कि किस्तों में तत्काल बदलाव की धारणा।

और खबरें पढ़ें

FinanceVelix की और खबरें

अस्वीकरण

यह FinanceVelix लेख सामान्य जानकारी प्रदान करता है, व्यक्तिगत वित्तीय, निवेश, कानूनी या कर संबंधी सलाह नहीं। बाजार मूल्य, ब्याज दरें और आर्थिक स्थितियाँ बदल सकती हैं; निवेश में नुकसान का जोखिम होता है। तथ्य प्रकाशन के समय उपलब्ध सामग्री पर आधारित हैं और बदल सकते हैं। महत्वपूर्ण जानकारी की स्वतंत्र रूप से जाँच करें और आवश्यकता पड़ने पर किसी योग्य पेशेवर से सलाह लें। किसी परिसंपत्ति, कंपनी या सेवा का उल्लेख समर्थन या अनुशंसा नहीं है।