थोक आयात को लेकर स्कॉच टैरिफ विवाद ने भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौते के एक प्रमुख लाभ को जांच के दायरे में ला दिया है। 23 अक्टूबर, 2026 को इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइन्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने चेतावनी दी कि स्कॉच कॉन्सन्ट्रेट्स को कम शुल्क से बाहर रखने से बातचीत के जरिए तय बाजार पहुंच कमजोर हो सकती है। इस बीच, भारतीय अधिकारी डियाजियो और पर्नो रिकार्ड के आयात की जांच कर रहे हैं।

मुख्य बातें

  • विवाद इस बात पर है कि क्या थोक स्कॉच कॉन्सन्ट्रेट्स व्यापार समझौते के तहत व्हिस्की पर लागू कम टैरिफ के पात्र हैं।
  • आयात के कथित गलत वर्गीकरण की जांच के सिलसिले में भारतीय जांचकर्ताओं ने अक्टूबर में डियाजियो और पर्नो रिकार्ड के कार्यालयों की तलाशी ली।
  • ब्रिटिश सरकार का कहना है कि वह इस मुद्दे को सुलझाने के लिए भारत के साथ काम कर रही है।

विषय-सूची

स्कॉच टैरिफ विवाद का मुख्य मुद्दा

भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता 15 जुलाई, 2026 को लागू हुआ। स्कॉच व्हिस्की टैरिफ में कटौती पर ब्रिटेन के दिशा-निर्देश HS कोड 2208.30 के तहत वर्गीकृत व्हिस्की के लिए तरजीही व्यवहार का उल्लेख करते हैं। इसके तहत शुल्क में तत्काल कटौती और फिर दस वर्षों में आगे की कटौतियां शामिल हैं। हालांकि, इन दिशा-निर्देशों से यह स्पष्ट नहीं होता कि जांच के दायरे में आए थोक कॉन्सन्ट्रेट्स इसके पात्र हैं या नहीं।

भारतीय जांचकर्ताओं ने कंपनियों को निजी तौर पर बताया है कि थोक स्कॉच कॉन्सन्ट्रेट्स को ऐसी वर्गीकरण श्रेणी में घोषित किया जाना चाहिए जिस पर पहले वाला, अधिक शुल्क लागू होता है। डियाजियो और पर्नो रिकार्ड का मानना है कि ब्रिटेन से आयात किए गए कॉन्सन्ट्रेट्स कम दर के पात्र होने चाहिए।

इसलिए असहमति इस बात को लेकर है कि किन आयातों को रियायत मिलेगी, न कि इस बात पर कि समझौते में व्हिस्की टैरिफ में कटौती शामिल है या नहीं। यह अंतर उन कंपनियों के लिए मायने रखता है जो स्थानीय स्तर पर उत्पादित स्पिरिट्स में मिलाने के लिए कॉन्सन्ट्रेट्स आयात करती हैं।

वस्तुविवरण
समझौते से पहले स्कॉच पर टैरिफ150%।
समझौता लागू होने पर तरजीही टैरिफपात्र स्कॉच व्हिस्की आयात पर 15 जुलाई, 2026 से 75%।
निर्धारित तरजीही टैरिफदस वर्षों में चरणबद्ध कटौतियों के बाद 40%।
थोक कॉन्सन्ट्रेट्स के लिए विवादित व्यवहारजांचकर्ताओं का कहना है कि 150% शुल्क वाली वर्गीकरण श्रेणी लागू होती है; कंपनियां कम दर के पक्ष में तर्क दे रही हैं।

सीमा-शुल्क जांच जारी रहने के बीच उद्योग ने मांगा स्पष्टीकरण

भारत के राजस्व खुफिया निदेशालय ने अक्टूबर में पर्नो रिकार्ड और डियाजियो के कार्यालयों की तलाशी ली और अधिकारियों से पूछताछ की। यह जांच इस बात को लेकर है कि क्या कम शुल्क पाने के लिए आयातित उत्पादों का गलत वर्गीकरण किया गया। दोनों कंपनियों ने उसी सप्ताह की शुरुआत में कहा था कि वे अधिकारियों के साथ सहयोग कर रही हैं।

23 अक्टूबर को भारत के वाणिज्य मंत्री को लिखे पत्र में, इंटरनेशनल स्पिरिट्स एंड वाइन्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कहा कि वर्गीकरण का मुद्दा “व्यवहार में, भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच बातचीत के जरिए तय और सहमत एक महत्वपूर्ण बाजार-पहुंच लाभ को कमजोर करने का जोखिम पैदा करता है।”

एसोसिएशन ने तर्क दिया कि समझौते में संबंधित टैरिफ मदों के तहत व्हिस्की के लिए स्पष्ट रूप से तरजीही व्यवहार दिया गया है और अनिश्चितता तथा व्यवधान से बचने के लिए तत्काल स्पष्टीकरण मांगा। उसने पत्र पर टिप्पणी करने से इनकार किया, जबकि भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने तत्काल कोई जवाब नहीं दिया। जांच से यह साबित नहीं होता कि किसी भी कंपनी ने आयात का गलत वर्गीकरण किया।

पेय कंपनियों के लिए थोक आयात क्यों मायने रखते हैं

पर्नो रिकार्ड और डियाजियो थोक कॉन्सन्ट्रेट्स आयात करती हैं और उन्हें अन्य सामग्रियों के साथ मिलाकर रॉयल स्टैग, ब्लेंडर्स प्राइड और मैकडॉवेल्स जैसे भारतीय ब्रांड बनाती हैं। इसलिए टैरिफ वर्गीकरण स्थानीय उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले इनपुट को प्रभावित करता है, न कि केवल आयातित स्कॉच की तैयार बोतलों को।

मात्रा के हिसाब से भारत पर्नो रिकार्ड का सबसे बड़ा बाजार है। क्रिसिल रेटिंग्स के अनुसार, भारत के आयातित स्पिरिट्स में ब्रिटेन की हिस्सेदारी लगभग 75% है, जिसका मुख्य कारण स्कॉच व्हिस्की है। इससे वर्गीकरण के मुद्दे का पेय व्यापार पर व्यापक असर पड़ता है।

ब्रिटिश सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा: “हम भारत सरकार के साथ इस मुद्दे को सुलझाने के लिए काम कर रहे हैं, ताकि ब्रिटेन के व्यवसाय व्यापार समझौते में सहमत टैरिफ के तहत निर्यात कर सकें।”

निष्कर्ष

अनसुलझा सवाल यह है कि क्या थोक स्कॉच कॉन्सन्ट्रेट्स बातचीत के जरिए तय रियायत के पात्र हैं। भारतीय अधिकारियों से स्पष्टीकरण और सीमा-शुल्क जांच का नतीजा आगे देखने योग्य घटनाक्रम हैं; ब्रिटिश सरकार ने पुष्टि की है कि भारत के साथ बातचीत जारी है।

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