23 अक्टूबर, 2026 को भारत का बेंचमार्क 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़कर 7.48% पहुंचा, जिससे भारत-अमेरिका यील्ड अंतर बढ़कर लगभग 251 आधार अंक हो गया। यह अंतर चार महीनों के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया, लेकिन केवल अतिरिक्त यील्ड भारतीय ऋण में विदेशी पोर्टफोलियो निवेश को निरंतर बनाए रखने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकती।

मुख्य बातें

  • भारत की 10-वर्षीय यील्ड 7.48% तक पहुंची, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड लगभग 4.96%–4.97% रही।
  • रुपये में उतार-चढ़ाव और मुद्रा हेजिंग की लागत विदेशी निवेशकों के लिए उपलब्ध अतिरिक्त यील्ड को कम कर सकती है।
  • रॉकफोर्ट फिनकैप के वेंकटाकृष्णन श्रीनिवासन को एक और ब्याज दर वृद्धि की धारणा के आधार पर 7.25%–7.60% की ट्रेडिंग रेंज की उम्मीद है।

विषय-सूची

भारतीय उधारी यील्ड बढ़ने से भारत-अमेरिका यील्ड अंतर बढ़ा

शुक्रवार सुबह की तेजी से बेंचमार्क अंतर 250 आधार अंक से ऊपर पहुंच गया, जो 2.5 प्रतिशत अंक के बराबर है। सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों को लेकर चिंताओं के बीच भारतीय यील्ड बढ़ी हैं, जबकि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड ऊंची बनी हुई हैं।

समय के साथ यह अंतर काफी बदलता रहा है। 2020–21 के दौरान यह 500 आधार अंक से अधिक था, फिर तेजी से संकुचित हुआ और मई 2025 में लगभग 160 आधार अंक तक आ गया। हालिया बढ़ोतरी से भारतीय सॉवरेन ऋण की मुख्य यील्ड बढ़त मजबूत हुई है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि विदेशी मांग फिर से उबर गई है।

मदविवरण
भारत का 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड23 अक्टूबर, 2026 की सुबह यील्ड 7.48% थी।
अमेरिका का 10-वर्षीय ट्रेजरीउसी बाजार स्थिति में लगभग 4.96%–4.97%।
भारत-अमेरिका 10-वर्षीय अंतरलगभग 251 आधार अंक; चार महीनों में उच्चतम स्तर।

केवल मुख्य यील्ड अंतर से अधिक महत्वपूर्ण हैं मुद्रा लागत

रॉकफोर्ट फिनकैप एलएलपी के निदेशक वेंकटाकृष्णन श्रीनिवासन ने आगाह किया कि इस बढ़े हुए अंतर को अपने-आप में खरीदारी का संकेत नहीं मानना चाहिए। उन्होंने कहा, “मुझे उम्मीद नहीं है कि भारत-अमेरिका 10-वर्षीय अंतर के बढ़कर 251 बीपीएस हो जाने से, अपने-आप में, एफपीआई प्रवाह में उल्लेखनीय पुनरुद्धार होगा।”

विदेशी निवेशक के लिए रुपये का अवमूल्यन या हेजिंग का बढ़ा हुआ खर्च बॉन्ड से मिलने वाली अतिरिक्त आय को निष्प्रभावी कर सकता है। श्रीनिवासन ने कहा कि निरंतर खरीद के लिए आदर्श रूप से स्थिर होता रुपया, कम हेजिंग लागत, कच्चे तेल की घटती कीमतें और आकर्षक जोखिम-समायोजित रिटर्न जरूरी होंगे।

उन्होंने फुली एक्सेसिबल रूट के जरिए वास्तविक खरीद और रुपये के फॉरवर्ड बाजार में उतार-चढ़ाव पर नजर रखने की सलाह दी। ऐतिहासिक संदर्भ के तौर पर, अप्रैल 2020 में आरबीआई द्वारा फुली एक्सेसिबल रूट के तहत किए गए प्रावधान में मौजूदा विदेशी पोर्टफोलियो निवेश सहित निर्दिष्ट सरकारी प्रतिभूतियों में पात्र निवेश को उस रूट के अंतर्गत रखा गया था। उस परिपत्र से मौजूदा प्रवाह या अक्टूबर 2026 की बाजार यील्ड की पुष्टि नहीं होती।

ट्रेडिंग परिदृश्य एक और नीतिगत दर वृद्धि पर निर्भर

श्रीनिवासन को भारतीय 10-वर्षीय यील्ड के व्यापक 7.25%–7.60% दायरे में कारोबार करने की उम्मीद है। उनका आकलन दिसंबर में रेपो दर में 25 आधार अंक की एक और वृद्धि की संभावना को ध्यान में रखता है; यह विश्लेषक की धारणा है, घोषित नीतिगत निर्णय नहीं।

उन्होंने 7.50% को अपना निकट-अवधि यील्ड लक्ष्य बताया और चेतावनी दी कि इस स्तर के आसपास उतार-चढ़ाव तेज हो सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज बदलाव से यील्ड किसी भी दिशा में जा सकती हैं, जबकि उनके अनुमानित दायरे से आगे टिकाऊ बदलाव के लिए आगे मौद्रिक-नीति कार्रवाई की जरूरत पड़ सकती है।

निष्कर्ष

भारत-अमेरिका यील्ड अंतर बढ़ने से मुख्य आय अधिक मिलती है, लेकिन इससे विदेशी खरीद की गारंटी नहीं मिलती। फुली एक्सेसिबल रूट के जरिए वास्तविक खरीद, रुपये के फॉरवर्ड बाजार की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव पर नजर रखना अगले अहम संकेतक हैं।

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