25 अक्टूबर, 2026 तक निफ्टी का संवत घाटा लगभग 13% था। इससे भारतीय शेयर बाजार 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अपने सबसे कमजोर हिंदू वित्तीय वर्ष की ओर बढ़ रहा था। संवत 2083 शुरू होने में 15 दिन से भी कम समय बाकी था, और बढ़ी हुई अस्थिरता तथा छोटे शेयरों में अधिक नुकसान निवेशकों की सतर्कता बढ़ा रहे थे।

मुख्य बातें

  • संवत 2082 अभी जारी था, इसलिए निफ्टी का लगभग 13% नुकसान अंतिम वार्षिक रिटर्न नहीं था।
  • जियोजित के रणनीतिकार आनंद जेम्स ने कहा कि इंडिया VIX 30 से ऊपर चढ़ गया था और बाजार में टिकाऊ निचले स्तर के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे थे।
  • कुछ प्रमुख आईटी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शेयरों की मजबूती ने छोटे शेयरों की अधिक तीखी कमजोरी को छिपा दिया।

विषय-सूची

निफ्टी के संवत घाटे ने हालिया बढ़त का सिलसिला तोड़ा

यह गिरावट पिछले दशक के अधिकांश समय में दर्ज बढ़त से एक तीखा उलटफेर है। संवत 2071 और 2081 के बीच बाजार ने औसतन 12% रिटर्न दिया, जबकि कुछ वर्षों में इससे काफी अधिक तेजी दर्ज हुई।

मोदी के पदभार संभालने के बाद मौजूदा अवधि से पहले सबसे कमजोर संवत 2078 था, जब निफ्टी 1.4% गिरा था। यह अवधि 3 नवंबर, 2021 से 21 अक्टूबर, 2022 तक चली थी। उस दौरान वैश्विक ब्याज दरों में बढ़ोतरी, ऊंची महंगाई और रूस-यूक्रेन संघर्ष की पृष्ठभूमि थी।

मौजूदा नुकसान काफी बड़ा है, लेकिन अंतरिम गिरावट और संवत के पूर्ण हो चुके रिटर्न के बीच फर्क महत्वपूर्ण बना हुआ है: नए साल से पहले का कारोबार अंतिम तुलना को अब भी बदल सकता है।

मदविवरण
संवत 208225 अक्टूबर, 2026 तक निफ्टी लगभग 13% नीचे; अवधि अभी पूरी नहीं हुई।
संवत 20783 नवंबर, 2021 से 21 अक्टूबर, 2022 के बीच निफ्टी 1.4% गिरा।
संवत 208024.6% रिटर्न।
संवत 207740.2% रिटर्न।

अस्थिरता अनिश्चितता का संकेत है, बाजार के निचले स्तर का नहीं

जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य बाजार रणनीतिकार आनंद जेम्स ने कहा कि निफ्टी फिसलकर मई 2026 में देखे गए स्तरों पर आ गया था, जबकि इंडिया VIX 30 से ऊपर चढ़ गया था। उन्होंने कहा, “यह पहली बार है जब हम बाजार के निचले स्तर पर पहुंचने के स्पष्ट संकेतों के बिना संवत अवधि में प्रवेश कर रहे हैं।”

इंडिया VIX के बारे में NSE की व्याख्या के अनुसार, यह निफ्टी ऑप्शन की कीमतों से गणना किया जाने वाला सूचकांक है, जो अगले 30 कैलेंडर दिनों में अपेक्षित अस्थिरता को मापता है। यह उतार-चढ़ाव के अनुमानित पैमाने को मापता है, न कि यह तय करता है कि शेयरों में तेजी आएगी या गिरावट।

जेम्स ने यह भी कहा कि बेंचमार्क ने बाजार की सतह के नीचे की कमजोरी को कम करके दिखाया, क्योंकि कुछ बड़े आईटी और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शेयर टिके रहे थे। स्मॉल-कैप शेयरों में प्रमुख सूचकांकों की तुलना में अधिक तीखी गिरावट आई, जिससे निवेशक नए उत्प्रेरकों की तलाश में थे।

तेल और नकदी की चिंताओं से धारणा पर दबाव

कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच रही थीं। महंगाई की चिंताएं, भू-राजनीतिक जोखिम और नकदी की उपलब्धता धीमी होने के संकेत सतर्क माहौल की पृष्ठभूमि थे। जेम्स ने चेतावनी दी कि बाजार के महत्वपूर्ण समर्थन स्तरों के पास कारोबार करने के बावजूद आगे और गिरावट की आशंका को खारिज नहीं किया जा सकता।

हाल के आरंभिक सार्वजनिक निर्गमों में लगाए गए धन अंततः द्वितीयक बाजारों में लौट सकते हैं, लेकिन इस संभावना से यह साबित नहीं होता कि कमजोरी की वजह केवल नकदी की उपलब्धता है।

हेलिओस कैपिटल एसेट मैनेजमेंट के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी दिनशॉ ईरानी ने तर्क दिया कि जब पैसा महंगा होता है, तब वृद्धि अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। निकट अवधि की अस्थिरता के बावजूद वह भारत के संरचनात्मक विकास चालकों को लेकर सकारात्मक रहे और टिकाऊ वृद्धि देने में सक्षम कंपनियों पर जोर दिया।

निष्कर्ष

अगला पड़ाव संवत 2083 में प्रवेश है। संवत 2082 के समाप्त होने तक लगभग 13% की गिरावट अंतरिम ही रहेगी, जबकि अस्थिरता और बेंचमार्क से परे कमजोरी बाजार की स्थिति के आकलन में केंद्रीय बनी रहेंगी।

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