23 अक्टूबर, 2026 को RBI के कुल ₹2.5 लाख करोड़ के तरलता इंजेक्शन की आलोचना हुई। भारतीय स्टेट बैंक के अर्थशास्त्री सौम्य कांति घोष ने केंद्रीय बैंक की घोषित “संतुलित सख्ती” नीति के साथ इन इंजेक्शनों की संगति पर सवाल उठाए। 19 अक्टूबर से शुरू हुए तीन रेपो परिचालनों ने धन उपलब्ध कराया, जबकि भारतीय रिज़र्व बैंक तरलता सोखने के लिए नीलामियों का भी उपयोग कर रहा था।

मुख्य बातें

  • घोष ने सवाल उठाया कि क्या तरलता इंजेक्शन RBI के अक्टूबर के सख्ती वाले संदेश के अनुरूप थे।
  • RBI ने तरलता उपलब्ध कराने वाली रेपो नीलामियों और तरलता सोखने वाली रिवर्स रेपो नीलामियों—दोनों का उपयोग किया।
  • आलोचना नीतिगत संकेतों को लेकर थी, RBI के रुख में घोषित बदलाव को लेकर नहीं।

विषय-सूची

RBI के तरलता परिचालनों से नीतिगत संकेतों पर सवाल

23 अक्टूबर के इकोरैप आकलन में RBI के मौद्रिक नीति संचार और उसके बाद के मुद्रा-बाज़ार परिचालनों के बीच अंतर को रेखांकित किया गया। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने अक्टूबर की नीति बैठक में तरलता सोखने के लिए उपयुक्त उपायों का उपयोग करने पर ज़ोर दिया था।

SBI के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य घोष ने कहा कि रेपो के ज़रिये किए गए तरलता इंजेक्शन को उस संदेश के साथ जोड़ना कठिन था। उन्होंने इन परिचालनों को “संतुलित सख्ती के तौर-तरीके से असंगत” बताया।

SBI की 23 अक्टूबर की इकोरैप सूची में प्रकाशन का शीर्षक “RBI नीति संचार में विचलन से अभिसरण की ओर” दिया गया है। यह सूची रिपोर्ट की तारीख और शीर्षक की पुष्टि करती है, न कि नीलामियों के मूल आंकड़े उपलब्ध कराती है।

मदविवरण
इंजेक्शन की अवधि19 अक्टूबर, 2026 से शुरू हुए तीन रेपो परिचालन।
कुल तरलता इंजेक्ट की गई₹2.5 लाख करोड़, जो ₹2.5 ट्रिलियन के बराबर है।
तरलता सोखने का साधनपरिवर्तनीय रिवर्स रेपो दर नीलामियां।
घोषित नीतिगत रुखअक्टूबर 2026 की मौद्रिक नीति बैठक में संतुलित सख्ती।

महंगाई और बाहरी स्थिरता से संदेश जटिल

घोष ने कहा कि अगस्त की नीति के संचार की तुलना में अक्टूबर में गवर्नर के संदेश में बाहरी परिस्थितियों और वित्तीय स्थिरता पर अधिक, और तरलता तथा मौद्रिक नीति के प्रभाव-संचरण पर कम ज़ोर दिया गया।

उनके आकलन के अनुसार, बढ़ते भू-राजनीतिक संघर्षों से बाहरी स्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ीं, जबकि महंगाई संबंधी चिंताओं के चलते दर बढ़ाई गई। उन्होंने तर्क दिया कि तरलता सोखने और नए इंजेक्शन देने का मेल परस्पर प्रतिस्पर्धी उद्देश्यों के बीच संतुलन साधने के प्रयास का संकेत था।

रेपो नीलामियां बैंकिंग प्रणाली को धन उपलब्ध कराती हैं, जबकि रिवर्स रेपो नीलामियां धन सोखती हैं। यह अंतर महत्वपूर्ण है: आलोचना इस बात को लेकर थी कि ये परिचालन घोषित सख्ती वाले रुख के साथ किस तरह मेल खाते हैं, न कि इस बात का सबूत कि RBI ने औपचारिक रूप से अपना रुख छोड़ दिया है। “मामूली संतुलित सख्ती” की ओर बदलाव को लेकर घोष का सवाल उनकी व्याख्या थी, केंद्रीय बैंक की कोई नई नीतिगत घोषणा नहीं।

निष्कर्ष

सवाल यह है कि क्या RBI के तरलता परिचालन उसके सख्ती वाले संदेश को पुष्ट करते हैं या उसे अस्पष्ट बनाते हैं। आगे की नीलामी गतिविधियां और नीतिगत संचार देखने योग्य संकेत होंगे; घोष की आलोचना अपने आप में केंद्रीय बैंक के रुख में बदलाव स्थापित नहीं करती।

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