ट्रेड प्रमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया ने 21 अक्टूबर, 2026 की घोषणा में कहा कि भारत के खाद्य निर्यात के लिए यूके में विस्तार की काफी गुंजाइश है। उसने ब्रिटेन के वार्षिक प्रसंस्कृत-खाद्य आयात में भारत की 0.6% हिस्सेदारी का हवाला दिया। उद्योग निकाय ने द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत कारोबारी अवसरों का लाभ उठाने में व्यवसायों की मदद के लिए यूके-इंडिया बिजनेस काउंसिल के साथ साझेदारी की है।
मुख्य बातें
- TPCI के अनुसार, यूके के प्रसंस्कृत-खाद्य आयात में भारत की हिस्सेदारी 50.68 अरब डॉलर के वार्षिक बाजार में 309.5 मिलियन डॉलर है।
- उद्योग निकाय का कहना है कि व्यापार समझौते के तहत प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों, झींगा और इंस्टेंट कॉफी पर यूके के शुल्क समाप्त कर दिए गए हैं।
- TPCI–UKIBC की नई साझेदारी कारोबारी संपर्कों, व्यापार मिशनों और बाजार संबंधी जानकारी को समर्थन देगी।
विषय-सूची
- यूके के बाजार में भारत के खाद्य निर्यात की शुरुआती हिस्सेदारी कम
- शुल्क में राहत से बाजार तक पहुंच की शर्तें बदलीं
- लंदन के व्यापार कार्यक्रम के बाद कारोबारी साझेदारी
- निष्कर्ष
यूके के बाजार में भारत के खाद्य निर्यात की शुरुआती हिस्सेदारी कम
TPCI के अध्यक्ष मोहित सिंघला ने भारत–यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते, जिसे CETA के नाम से जाना जाता है, के बाद खाद्य और पेय पदार्थों को विस्तार के क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया। TPCI ने कहा कि यह समझौता 15 जुलाई, 2026 को लागू हुआ।
काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, यूके को भारत का प्रसंस्कृत-खाद्य निर्यात 309.5 मिलियन डॉलर था, जो ब्रिटेन के 50.68 अरब डॉलर के वार्षिक प्रसंस्कृत-खाद्य आयात का लगभग 0.6% है। घोषणा में इन आंकड़ों की रिपोर्टिंग अवधि नहीं बताई गई।
यह छोटी हिस्सेदारी निर्यातकों की शुरुआती स्थिति दर्शाती है, भविष्य की बिक्री का पूर्वानुमान नहीं। TPCI ने निर्यात-वृद्धि का कोई लक्ष्य या भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने की समय-सीमा घोषित नहीं की।
| मद | विवरण |
|---|---|
| प्रसंस्कृत-खाद्य शुल्क | पहले 70% तक; TPCI के अनुसार, CETA के तहत समाप्त। |
| झींगा पर शुल्क | पहले 4.2%–8.5%; TPCI के अनुसार, CETA के तहत समाप्त। |
| इंस्टेंट कॉफी पर शुल्क | TPCI के अनुसार, CETA के तहत समाप्त; पहले की दर नहीं बताई गई। |
शुल्क में राहत से बाजार तक पहुंच की शर्तें बदलीं
सिंघला ने कहा कि CETA के तहत प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों पर 70% तक के यूके शुल्क, झींगा पर 4.2%–8.5% के शुल्क और इंस्टेंट कॉफी पर शुल्क समाप्त कर दिए गए हैं।
शुल्क में इन बदलावों से प्रभावित भारतीय उत्पादों के लिए सीमा-पार लागत की एक बाधा कम होती है। यह पूरी हो चुकी निर्यात खेपों से अलग बात है: घोषणा में बाजार तक बेहतर पहुंच और कारोबारी विकास के प्रयासों का वर्णन था, न कि समझौते के बाद शिपमेंट में मापी गई वृद्धि की रिपोर्ट।
लंदन के व्यापार कार्यक्रम के बाद कारोबारी साझेदारी
TPCI–UKIBC कारोबारी सहयोग ढांचा कंपनियों को जोड़ने, व्यापार मिशनों को सुगम बनाने, बाजार संबंधी जानकारी साझा करने और दोनों देशों के लघु एवं मध्यम आकार के उद्यमों के लिए अवसर पैदा करने पर केंद्रित है।
इन संगठनों ने 15 अक्टूबर, 2026 को लंदन में भारत–यूके खाद्य और पेय व्यापार कार्यक्रम भी आयोजित किया, जिसमें 48 भारतीय निर्यातक कंपनियों और यूके स्थित 150 आयातकों ने हिस्सा लिया।
सिंघला ने कहा कि CETA के लागू होने के बाद संगठन द्विपक्षीय व्यापार के विकास पर काम करेंगे, ताकि समझौते को वाणिज्यिक परिणामों में बदला जा सके।
निष्कर्ष
TPCI ने अगले कदम के रूप में UKIBC साझेदारी के जरिए व्यावहारिक कारोबारी सहयोग की रूपरेखा दी है। इस काम से अतिरिक्त ऑर्डर और शिपमेंट मिलते हैं या नहीं, इसी से तय होगा कि यूके के बाजार में भारत के खाद्य निर्यात अपनी मौजूदा छोटी हिस्सेदारी से कितना आगे बढ़ते हैं।
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